राजस्थान में सूखे जैसे हालात

सूखा
Image caption भारत के कई राज्य सूखे की मार झेल रहे हैं

राजस्थान में सरकार ने सूखे की संभावना से निबटने के लिए सभी विभागोंको आपात योजना बनाने के निर्देश दिए है.

राज्य में सूखे से हुए फ़सली नुक़सान के सर्वे का काम भी शुरू कर दिया गया है.

जानकारों के अनुसार आधे से ज़्यादा राजस्थान सूखे की चपेट में है. राज्य में खेतीबाड़ी के लिए बिजली मुहैया कराने के लिए उद्योगों पर पॉवर कटलागू कर दिया गया है.

मुख्यमंत्रीअशोक गहलोत ने केंद्र से रोज़गार गारंटी योजना (नरेगा) के ज़रिए मिलने वाले काम की अवधि दोगुनी करने का आग्रह किया है. उधर विपक्ष ने सरकार पर हाथ पर हाथ पर हाथ धरकर बैठने का अरोप लगाया है.

मुख्यमंत्री ने जयपुर में अधिकारिओं के साथ बैठक कर हालतका जायज़ा लिया और कहा सरकार सूखे से प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद करेगी.

बार बार सूखा

अशोक गहलोत का कहना है, ''राजस्थान में पिछले 64 साल में 55 बार सूखे के हालत रहे हैं, राज्य के लोग सूखे से वाक़िफ़ हैं और हालत का मुक़ाबला करना जानते है. सरकार जनता के साथ है और सभी लोग मिलकर इसका सामना करेंगे. हम विपक्ष से भी इसमें सहयोग की अपील कर रहे हैं."

उनका कहना है कि सर्वे का कम अगले 15 दिन में पूरा हो जाएगा. इसके बाद केंद्रीय टीम राज्य का दौरा करने आएगी और हालात का जायज़ा लेगी.

गहलोत का कहना था, "संकट बहुत गंभीर है, पीने के पानी और बिजली की समस्या बहुत बड़ी है. पशुओं के लिए चारे का भी संकट है. हमने ऐसे हालत में चारे के उत्पादन की योजना बनाने के भी निर्देश दिए है."

मुख्यमंत्री कहते हैं, " राज्य में इस साल 83 प्रतिशत बुआई हुई थी, मगर पिछले 15 दिनों से बारिश नहीं होने से ये बर्बादी के कगार पर है."

'नरेगा' की अवधि बढ़े

सरकार ने केंद्र से सूखा प्रभावित इलाक़ों में राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार योजना की कार्य अवधि एकसौ दिन से बढ़ाकर दो सौ करने की माँग की है, ताकि अकाल की हालत में लोगों को पूरे समय काम मिल सके.

राज्य सरकार के मुताबिक़ वोबिजली दूसरे राज्यों से ख़रीदने को तैयार है, मगर दूसरे राज्यों में भी संकट की स्थिति बनी हुई है, ऐसे में स्थिति ख़राब हो सकती है.

उधर विपक्ष ने आरोप लगाया है की लोग बिजली पानी को तरस रहे है, लेकिन सरकार कुछ नहीं कर रही है.

राज्य में बिजली और पानी को लेकर कर लोग जगह-जगह विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं जबकि अभी ये संकट की शुरुआत मानी जा रही है.