ध्वज बनाने वाले के नाम डाक टिकट

पिंगली वैंकया के नाम डाक टिकट.
Image caption पाँच रुपये के डाक टिकट पर पिंगली की तस्वीर के साथ उनके ज़रिए डिज़ाइन किए गए झंडे का भी फो़टो है.

भारत का राष्ट्रीय ध्वज डिज़ाइन करने वाले पिंगली वैंकया के सम्मान में भारत सरकार ने उनके नाम से डाक टिकट जारी किया है.

अट्ठासी साल पहले वैंकया ने महात्मा गाँधी को झंडे का पहला संस्करण दिखाया था.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाइएस राजशेखर रेड्डी ने हैदराबाद में एक साधारण समारोह में डाक विभाग और पिंगली वैंकया मेमोरियल ट्रस्ट के उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में यह डाक टिकट जारी किया.

इस अवसर पर राजशेखर रेड्डी का कहना था, "मैं पिंगली जी के स्मरण में डाक टिकट जारी करके बहुत खुश हूँ."

पाँच रुपये के डाक टिकट पर पिंगली की तस्वीर के साथ-साथ उनके ज़रिए डिज़ाइन किए गए झंडे को भी जगह दी गई है.

झंडे में फेरबदल

पिंगली ने शुरुआत में जो झंडा डिज़ाइन किया था वो सिर्फ़ दो रंगों का था, लाल और हरा. झंडे के बीच में चरखा हंसराज के सुझाव पर बाद में जोड़ा गया था.

उन्होंने ये झंडा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के बेज़वाडा अधिवेशन में गाँधी जी के समक्ष पेश किया था. जब पार्टी ने झंडे को मंजूरी दे दी तो बाद में पार्टी के होने वाले सभी अधिवेशनों में ये झंडा फहराया जाता रहा.

बाद में गांधी जी के सुझाव पर झंड में सफ़ेद पट्टी जोड़ी गई और इस तरह झंडा तीन रंगों का हो गया. आगे चलकर चरखे की जगह राष्ट्रीय प्रतीक स्वरूप अशोक चक्र को जगह मिली.

Image caption अट्ठासी साल पहले वैंकया ने महात्मा गाँधी को झंडे का पहला संस्करण पेश किया था

पिंगली वैंकया मेमोरियल ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष जगदंबा याद करते हुए कहते हैं कि आंध्र प्रदेश के मासुलीपटनम के रहने वाले पिंगली वैंकया ने पाँच वर्षों में तीस देशों के झंडों का अध्ययन करने के बाद भारत का झंडा तैयार किया था.

ये डाक टिकट पिंगली जी के 132वें जन्म दिवस पर दो अगस्त जारी किया जाना था. लेकिन कुछ कारणवश उस दिन जारी नहीं हो सका और बाद में किया गया.

पिंगली वैंकया ने उच्च शिक्षा प्राप्त करने से पहले रेलवे गार्ड के रुप में काम किया. बाद में वे कृषि वैज्ञानिक बने.

पिंगली वैंकया मेमोरियल ट्रस्ट ने पिंगली जी के योगदान के लिए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करने की माँग की है.

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