भारत में स्वाइन फ़्लू से दो और मौतें

स्वाइन फ़्लू से बचाव
Image caption लोगों के बीच बचाव के प्रति अलग अलग बातें भी प्रचलित हो रही हैं और इससे तनाव बढ़ रहा है

स्वाइन फ़्लू ने गुरुवार को दो और लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है. इस तरह स्वाइन फ़्लू से मरनेवालों की तादाद बढ़कर 20 हो गई है.

समाचार एजेंसियों के मुताबिक गुरुवार को पुणे में एक बच्चे और एक वृद्ध महिला की मौत स्वाइन फ़्लू के कारण हो गई है जबकि बेंगलुरु में एक महिला की स्वाइन फ़्लू के कारण मौत हो गई है.

इस बीमारी का आतंक महाराष्ट्र और ख़ासकर मुंबई, पुणे के सिर चढ़कर बोलता नज़र आ रहा है. दोनों प्रमुख शहरों में जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और सन्नाटा, भय पसरा नज़र आ रहा है.

देशभर में 1200 से अधिक लोग स्वाइन फ़्लू से ग्रस्त बताए जा रहे हैं और इनका अलग अलग हिस्सों में इलाज जारी है.

महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, केरल, दिल्ली, गुजरात, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में मेघालय इस बीमारी से सीधे तौर पर प्रभावित बताए जा रहे हैं.

सर्वाधिक प्रभावित राज्य महाराष्ट्र में स्कूलों, कॉलेजों को एक सप्ताह के लिए बंद करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं. साथ ही सिनेमाघरों और मॉलों को भी बंद रखने का आदेश जारी किया गया है.

केंद्र सरकार पहले ही प्रभावित राज्यों में अपने दल भेजने और राज्य व केंद्र के बीच एक सामन्जस्य बनाकर काम करने की बात कह चुकी है. अधिकतर राज्य सरकार ने कहा है कि स्थिति अभी इतनी चिंताजनक नहीं है और उनकी ओर से तैयारी पूरी कर ली गई हैं.

स्वाइन फ़्लू का भय

पर सरकारी दावों से उलट लोगों के बीच स्वाइन फ़्लू का भय साफ़ नज़र आ रहा है. लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचते हुए या रूमाल, मास्क लगाकर चलते हुए देखा जा रहा है. कई शहरों में अभिभावकों ने स्वाइन फ़्लू के मामले सामने आने के बाद से अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है.

यहाँ तक कि जन्माष्टमी, स्वतंत्रता दिवस के लिए होने वाली तैयारियों में महाराष्ट्र के अधिकतर इलाकों में पहले जैसा जोश देखने को नहीं मिल रहा है.

मुंबई से बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद ने बताया कि लोगों के मन में स्वाइन फ़्लू का भय बुरी तरह से बैठा हुआ है. बंद की घोषणा के पहले से ही मंबई की कई सड़कें और सार्वजनिक स्थान वीरान से लगने लगे हैं.

पुणे से स्थानीय लोगों ने बीबीसी को बताया कि यह शहर भूतों के शहर जैसा लगने लगा है. चारों ओर लोगों का बाहर आना बंद है और जनजीवन पूरी तरह से ठप्प नज़र आ रहा है.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने लोगों से अपील भी की है कि सार्वजनिक उत्सवों, समारोहों में बहुत संख्या में पहुंचने या उन्हें बड़े पैमाने पर मनाने से बचना चाहिए.

'फ़्लू नहीं, लोगों की मांग पर बंद'

पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण का कहना है कि बंद की घोषणा के पीछे फ़्लू के ख़तरे को लेकर चिंता नहीं, बल्कि लोगों की मांग है.

उन्होंने सीएनएन-आईबीएन चैनल को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि दरअसल, स्वाइन फ़्लू की स्थिति इतनी भयावह नहीं है जितनी कि बताई जा रही है. राज्य सरकार के पास इससे निपटने के पर्याप्त इंतज़ाम हैं.

उन्होंने कहा, राज्य में लोगों की ओर से यह विचार आया कि अगर कुछ दिनों के लिए बंद घोषित हो जाए तो स्थितियां नियंत्रित रहेंगी और लोगों को कुछ राहत भी मिलेगी.

यह पूछे जाने पर कि अगर राज्य सरकार को स्थिति इतनी चिंताजनक नज़र नहीं आ रही है तो क्या एक सप्ताह के बंद की घोषणा से लोगों में भय और चिंता और नहीं बढ़ेगी, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि लोगों को कतई घबराने की ज़रूरत नहीं है. बंद का फ़ैसला इसलिए लिया गया है ताकि लोग कुछ राहत महसूस कर सके.

उधर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आज़ाद ने कहा है कि जिन लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो रही है, उन्हें चाहिए कि वे घर पर रहें और अन्य लोगों के संपर्क में आने से बचें.

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