आडवाणी का इनकार, वापस लौटे भाजपा विधायक

भाजपा नेता
Image caption वसुंधरा समर्थक विधायक जयपुर लौट गए हैं.

राजस्थान मे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का संकट गहराता जा रहा है.

भाजपा आलाकमान और वसुंधरा राजे के समर्थक विधायक दोनों अपने-अपने रुख़ पर कायम हैं.

शुक्रवार को राजस्थान में पार्टी के 78 में से 57 विधायकों नें दिल्ली मे कहा की वसुंधरा को राजस्थान भाजपा विधायक दल के नेता के पद से नही हटाया जाना चाहिए.

अलवर से पार्टी विधायक ज्ञानदेव अहूजा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यहां मौजूद सभी विधायकों ने हर हालत मे वसुंधरा के साथ रहने का फ़ैसला किया है. ज्ञानदेव का लहजा तो थोड़ा नरम था और उन्होंने आग्रह जैसे शब्द का इस्तेमाल किया था लेकिन राजस्थान विधान सभा में भाजपा के मुख्य सचेतक राजेंद्र सिंह राठौर का रुख़ काफ़ी सख्त था.

उनका कहना था कि सारे विधायक अंतिम क्षण तक वसुंधरा के साथ रहेंगे. उन्होने ये भी कहा की अब जो भी फ़ैसला होगा वो राजस्थान की धरती पर होगा.

ये सभी विधायक वापस जयपुर लौट गए.

इन विधायकों ने सबसे पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मुलाक़ात की और उसके बाद वे पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के घर पर पहुँचे.

आडवाणी ने भाजपा विधायकों से मिलने से इनकार कर दिया जिसके बाद वसुंधरा समर्थक विधायक राजस्थान भवन लौट गए.

वसुंधरा समर्थक विधायक राजेंद्र सिंह राठौर का कहना था, "हम लोगों ने आडवाणी जी से मिलने के लिए पहले से समय नहीं माँगा था. इसलिए मुलाक़ात नहीं हो सकी."

सभी 57 विधायक लगभग आधे घंटे तक लाल कृष्ण आडवाणी के घर के बाहर खड़े रहे लेकिन मुलाक़ात नहीं होने पर वापस राजस्थान भवन लौट गए.

एक विधायक ने कहा कि दोपहर बाद वे आडवाणी जी से मिलेंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका.

'एकजुट हैं'

राजेंद्र सिंह राठौर का कहना था, "हम लोग 57 विधायक एक साथ हैं. चार अन्य विधायकों और दो सांसदों ने फैक्स भेज कर हमारा समर्थन किया है. हम चाहते हैं कि वसुंधरा राजे हमारी नेता बनी रहें."

उन्हीं के साथ खड़े एक और विधायक ज्ञानदीप आहूजा का कहना था, "हम यहां कोई शक्ति प्रदर्शन करने नहीं आए हैं जैसा कि बताया जा रहा है. हम चाहते हैं कि बातचीत से मामला सुलझ जाए."

भाजपा आलाकमान ने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी के बुरे प्रदर्शन के बाद राजस्थान में पार्टी के अध्यक्ष ओपी माथुर की छुट्टी कर दी थी.

इसके बाद गुरुवार को ऐसी ख़बरें आई कि शीर्ष नेतृत्व ने वसुंधरा राजे से भी इस्तीफ़ा माँगा है.

इसी के विरोध में राजे समर्थक विधायक लामबंद हुए और दिल्ली रवाना हो गए.

उधर वसुंधरा राजे ने कहा है कि उन्हें ऐसा कोई संदेश नहीं मिला है जिसके मद्देनज़र वो अपना पद छोड़ दें. उन्होंने कहा कि वो राजस्थान की जनता की सेवा करना चाहती है पर साथ ही ये भी कहा की पार्टी का कोई निर्देश होगा तो वो उसे मानेगीं.

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