'सूखे, फ़्लू से निपटने में लोग मदद करें'

भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने देश के नाम अपने संदेश में लोगों से आग्रह किया है कि वो सूखे से निपटने में सरकार का सहयोग करें.

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर अपने संदेश में राष्ट्रपति ने स्वाइन फ़्लू की रोकथाम के लिए उठाए जा रहे सरकारी क़दमों का भी उल्लेख किया.

प्रतिभा पाटिल ने कहा, “इस साल मानसून सामान्य नहीं रहा है जिससे कृषि और पानी की उपलब्धता पर असर पड़ा है.”

आम लोगों की भागीदारी पर ज़ोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा, “सूखे और स्वाइन फ़्लू को लेकर सरकार के क़दमों को कारगर बनाने के लिए लोगों को आगे आना होगा. साथ ही विकास से जुड़ी अन्य गतिविधियों में भी स्व सहायता समूहों के ज़रिए जुड़ना होगा.”

राष्ट्रपति का कहना था कि देश की सबसे बड़ी संपत्ति ऐसे नागरिक हैं जो अपने कर्तव्यों और सामाजिक दायित्वों को समझते हों, अनुशासन का पालन करें, साफ़ सफ़ाई का ध्यान रखें, प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करे और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हो.

'जबावदेही हो'

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि शासन को लोगों की ज़रूरतों के प्रति ज़्यादा जबावदेह होना होगा और अधिकारियों के काम में ईमानदारी, निष्ठा झलकनी चाहिए.

प्रतिभा पाटिल ने कहा, “लोगों की उम्मीदें बहुत बढ़ गई हैं. वे अपने अधिकारों को लेकर ज़्यादा सजग हैं. उन्हें सहूलियतें और सेवाएँ तभी उपलब्ध करवाई जा सकती हैं जब शासन कार्यकुशल हो, जिसमें जबावदेही हो.”

उनका कहना था कि जब कल्याणकारी योजनाओं के लिए दिया गया पैसा भ्रष्ट्राचार की भेंट चढ़ जाता है तो लोगों में रोश लाज़मी है.

राष्ट्रपति ने हाशिए पर रह रहे लोगों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि इन लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ देनी होंगी और कोई हुनर सिखाना होगा ताकि ये सशक्त महसूस करें.

उनका कहना था कि समाज में बदलाव के संकेत दिखने लगे हैं.

अपने संदेश में प्रतिभा पाटिल बोलीं, “आज लड़कियाँ स्कूल जा रही हैं जबकि उनके माता-पिता कभी स्कूल नहीं गए. ये अंतर एक पीढ़ी में आया है. लोग शिक्षा के फ़ायदे समझ रहे हैं.”

राष्ट्रपति ने शिक्षा क़ानून का ज़िक्र करते हुए कहा कि ये मील का पत्थर साबित होगा जिससे सब बच्चे शिक्षा पा सकेंगे.

प्रतिभा पाटिल ने कहा कि हमारा मकसद ये होना चाहिए कि ऐसे समाज की संरचना हो जिसमें सबके लिए जगह हो.