वसुंधरा पर त्यागपत्र के लिए दबाव

राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की विधायक दल की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर त्यागपत्र के लिए दबाव बढ़ता जा रहा है.

Image caption वसुंधरा पार्टी हाईकमान से निर्देश मिलने से इनकार कर रही हैं

वसुंधरा राजे अब तक इस बात पर अड़ी हुई हैं कि वे इस्तीफ़ा नहीं देंगी. वे ये भी कह रही हैं कि उन्हें इस बात की कोई ख़बर पार्टी ने नहीं दी है.

लेकिन प्रदेश पार्टी अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने वसुंधरा राजे से बात की थी और उन्हें विधानसभा में विपक्ष की नेता का पद छोड़ने को कहा था.

उन्होंने वसुंधरा राजे के इनकार पर कुछ भी कहने से मना कर दिया.

नई स्थिति में जैसे-जैसे वक़्त गुज़रता जा रहा है, पार्टी संगठन से जुड़े नेताओं का कहना है कि वसुंधरा राजे के सामने कोई विकल्प नहीं है, या तो वे पार्टी से निलंबन की कार्रवाई झेलें और नई पार्टी का गठन करें या फिर इस्तीफ़ा दें.

नई परिस्थिति

जो विधायक बड़े जोश और उत्साह के साथ दिल्ली गए थे, वे वापस लौटे तो उनके क़दम ठिठके हुए थे.

हालाँकि वसुंधरा राजे समर्थक विधायक अब भी इस पर अड़े हुए हैं कि उनकी नेता का कोई बाल बाँका नहीं कर सकता.

क्योंकि अब तक पार्टी में उनकी स्थिति अपराजेय रही है. पार्टी ने हमेशा उनको तरजीह दी है चाहे भैरोसिंह शेखावत से उनका मतभेद रहा हो या जसवंत सिंह के साथ.

इसी विश्वास से विधायक वसुंधरा राजे के पीछे गोलबंद हैं. लेकिन आज या कल में ये फ़ैसला हो जाएगा कि वसुंधरा राजे कौन सा रास्ता अपनाती हैं.

पार्टी ने हमेशा वसुंधरा राजे को अभयदान दिया है और उनकी किसी बात को टाला नहीं गया है. लेकिन विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के कारण इस बार उनकी स्थिति थोड़ी अलग है. उनके सामने अब कड़ी चुनौती है.

वसुंधरा राजे ये जानती हैं कि एक बार उनके साथ से पद गया तो फिर उनकी वापसी काफ़ी मुश्किल होगी. अब उनके विरोधी भी खुल कर बोलने लगे हैं.

दूसरी ओर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनकी खाई और चौड़ी होती जा रही है.

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