पटरी पर दौड़ी विरासत

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के हावड़ा स्टेशन से रविवार की भीगी दुपहरिया में जब कोयले का धुआं छोड़ते हुए इस इंजन ने सत्रह डिब्बों वाली हेरिटेज ट्रेन के साथ पटरी पर आगे बढ़ना शुरू किया तो समय का पहिया मानो अतीत में 155 साल पीछे की ओर घूम गया.

हावड़ा और हुगली के बीच 115 साल पहले स्टीम इंजन के सहारे ही पहली ट्रेन चली थी. शहंशाह नामक इस स्टीम इंजन के साथ जुड़ी ट्रेन पर मंत्रियों, रेलवे अधिकारियों, स्कूली बच्चों और मीडिया के लोगों समेत कोई डेढ़ सौ लोग सवार थे.

इसे देखने के लिए हावड़ा के अलावा बंडल तक के रास्ते में हर स्टेशन पर लोगों की भारी भीड़ जुटी थी.

इस ट्रेन ने मेरी जवानी के दिनों की यादें ताजा कर दीं. मैं अपने भाइयों के साथ व्यापार के सिलसिले में स्टीम इंजन वाली पैसेंजर से ही कोलकाता जाता था.

तीर्थंकर दास

इनमें से कई तो ऐसे थे जिन्होंने अपने जीवन में पहली बार स्टीम इंजन देखा था. हावड़ा से बंडेल तक की चालीस किलोमीटर की दूरी तय करने में इस ट्रेन को कोई सवा दो घंटे लग गए.

हावड़ा से पूर्वी रेलवे की पहली ट्रेन 15 अगस्त, 1854 को चली थी. उस ट्रेन पर तीन सौ यात्री सवार थे. उनको उन तीन हज़ार लोगों में से चुना गया जिन्होंने उस ट्रेन की पहली सवारी के लिए आवेदन किया था.

रेलवे के एक अधिकारी पुराने रिकॉर्ड के हवाले बताते हैं कि उस समय हुगली नदी के कोलकाता की ओर वाले किनारे पर इकलौती टिकट खिड़की थी. यात्री वहां से टिकट खरीदने के बाद हुगली नदी पार कर हावड़ा पहुंचते थे. तब हावड़ा से एक जोड़ी ट्रेनें ही चलती थीं.

अनुभव

स्टीम इंजन

बच्चे इंजन से निकल रहे भाप को देखते हुए.

कइयों ने तो पहली बार किसी स्टीम इंजन को ट्रेन खींचते देखा था.

हावड़ा में अनिरुद्ध पाल कहते हैं कि, "मैंने अपने पिता और दादा से स्टीम इंजन के बारे में सुना तो था. लेकिन स्टीम इंजन वाली ट्रेन पहली बार देख रहा हूं."

बंडेल में जुटी भीड़ में एक बुजुर्ग तीर्थंकर दास का कहना था, "हमारे समय में तो सिर्फ स्टीम इंजन ही थे. उसके बाद पहले डीजल इंजन आया और तब बिजली से चलने वाला."

वे कहते हैं,"इस ट्रेन ने मेरी जवानी के दिनों की यादें ताजा कर दीं. मैं अपने भाइयों के साथ व्यापार के सिलसिले में स्टीम इंजन वाली पैसेंजर से ही कोलकाता जाता था."

हावड़ा से बंडेल के रास्ते में यह ट्रेन थोड़ी देर के लिए रिसड़ा, श्रीरामपुर और हुगली स्टेशनों पर रुकी थी. हर जगह लोगों में इसकी तस्वीरें उतारने की होड़ लगी थी.

इस ट्रेन के रवाना होने से पहले हावड़ा स्टेशन पर आयोजित एक समारोह में हावड़ा, चेन्नई, छत्रपति शिवाजी टर्मिनल और दिल्ली स्टेशन पर डाक टिकट जारी किए गए.

केंद्रीय मंत्री गुरुदास कामत ने इन डाकटिकटों को जारी किया. इस मौके पर रेलवे राज्य मंत्री ई अहमद, जहाजरानी राज्य मंत्री मुकुल राय और रेलवे के आला अधिकारी मौजूद थे. इस मौके पर हावड़ा स्टेशन पर पूर्व रेलवे के डेढ़ सौ साल से भी लंबे सफर को बयान करने वाली एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया था.

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