यूपी में दिमाग़ी बुखार से 129 की मौत

दिमाग़ी बुखार (फ़ाइल फ़ोटो)

दिमाग़ी बुखार हर साल पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में बच्चों की जान लेता है

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार इस साल अब तक उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों में इंसेफ़्लाइटिस यानी दिमाग़ी बुखार से 129 लोगों की मौत हो गई है.

एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि 640 लोगों को इंसेफ़्लाइटिस के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था जिनमें से 129 की मौत हो गई.

इस बीमारी से मरने वालों की प्रतिशत काफ़ी अधिक और चिंताजनक है.

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर मामले गोरखपुर और आसपास के सात जिलों से हैं और दिमाग़ी बुखार के अधिकतर शिकार बच्चे हुए हैं.

डॉक्टरों का कहना है कि इनमें से 15 मामले जापानी इंसेफ़्लाइटिस के पाए गए हैं.

जापानी इंसेफ़्लाइटिस वायरस हर साल बारिश के मौसम में पूर्वी उत्तर प्रदेश के इस इलाके में मौत का क़हर बन कर आता है.

बच्चों पर मार

यह न केवल सैकड़ों बच्चों की जान ले लेता है बल्कि हज़ारों को स्थाई रूप से विकलांग बना देता है.

बच्चों के वार्ड में 100 मरीजों को भर्ती किया गया है और हर दिन और मरीज आते जा रहे हैं.

डॉक्टर केपी कुशवाह, गोरखपुर मेडिकल कॉलेज

लेकिन अन्य मरीज किस तरह के वायरस से पीड़ित हैं, इसकी जानकारी डॉक्टरों को नहीं है.

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर केपी कुशवाहा का कहना था कि बच्चों के वार्ड में 100 मरीजों को भर्ती किया गया है. उनका कहना था कि हर दिन और मरीज आते जा रहे हैं.

ये इलाक़ा नेपाल से सटा हुआ है और वहाँ की नदियों में आई बाढ़ का पानी इस इलाक़े तक आ जाता है.

डॉक्टरों का कहना है कि दिमाग़ी बुख़ार एक तरह के विषाणु से होता है और यह विषाणु ख़ासतौर से मच्छर से फैलता है.

ग़ौरतलब है कि उत्तर प्रदेश का पूर्वी इलाक़ा पिछड़ा हुआ है और यहाँ स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है.

पिछले 30 वर्ष से इस इलाक़े में दिमाग़ी बुखार की वजह से मौतें होती आ रही हैं. वर्ष 2005 में इसने यहाँ क़हर बरपाया था.

काफ़ी हंगामे के बाद सरकार ने इसकी रोकथाम के लिए चीन से टीके का आयात किया था.

इसके बाद व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया गया लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इस साल ये अभियान संतोषजनक नहीं रहा है.

लोगों की शिकायत है कि इंसेफ़्लाइटिस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता क्योंकि इससे ग्रामीण क्षेत्र के ग़रीब लोग प्रभावित होते हैं.

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