जिन्ना पर जसवंत के विचार से भाजपा असहमत

जसवंत सिंह
Image caption जसवंत सिंह की किताब से विवाद उठ खड़ा हुआ है

भारतीय जनता पार्टी ने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना पर पार्टी नेता जसवंत सिंह की विवादास्पद पुस्तक से खुद को अलग कर लिया है.

भाजपा नेता जसवंत सिंह ने अपनी पुस्तक 'जिन्ना- भारत, विभाजन और स्वतंत्रता' में कहा है कि भारत में जिन्ना को खलनायक के तौर पर पेश किया गया है.

पुस्तक में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और कांग्रेस पार्टी को भी विभाजन के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया है.

ग़ौरतलब है कि भारत में जिन्ना की छवि बेहद विवादास्पद रही है और भारत विभाजन के लिए उन्हीं को दोषी माना जाता है.

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने एक बयान में कहा है कि पुस्तक में जसवंत सिंह के व्यक्त किए गए विचार पार्टी के विचार नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि पार्टी किताब में कही गई बातों से खुद को पूरी तरह से अलग करती है.

राजनाथ सिंह ने कहा कि जिन्ना ने देश के विभाजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसकी वजह से लाखों लोगों को विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा.

उनका कहना था," ये भी सर्वविदित तथ्य है कि हम इतिहास के इस दर्दनाक हिस्से को कभी भूल नहीं सकते."

जबकि जसवंत सिंह ने कहा है कि उनकी किताब शुद्ध रूप से एक बौद्धिक काम है जिसे पढ़कर समझा जाना चाहिए.

एक टीवी चैनल से उन्होंने कहा," मेरी किताब का उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना या किसी का महिमामंडन करना नहीं है."

नई दिल्ली में सोमवार की शाम को जसवंत सिंह की पुस्तक के विमोचन के मौक़े पर भाजपा का कोई भी नेता मौजूद नहीं था.

जसवंत सिंह भाजपा के दूसरे बड़े नेता हैं जिनकी जिन्ना पर की गई टिप्पणी को लेकर आलोचना हुई है.

वर्ष 2005 में पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष कहा था जिसकी वजह से देश भर में उनकी काफ़ी आलोचना हुई थी.

जहां तक जिन्ना का सवाल है भारत में आज भी उन्हें विभाजन का दोषी माना जाता है क्योंकि उन्होंने मुसलमानों के लिए अलग देश की मुहिम चलाई थी.

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