जसवंत सिंह भाजपा से निकाले गए

जसवंत सिंह
Image caption जसवंत सिंह ने विभाजन के लिए जिन्ना के साथ सरदार पटेल और जवाहर लाल नेहरु को भी ज़िम्मेदार ठहराया था

अपनी किताब में मोहम्मद अली जिन्ना की तारीफ़ करने के कारण वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह को भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है.

जसवंत सिंह पार्टी की चिंतन बैठक में शामिल होने के लिए शिमला पहुँचे थे लेकिन उन्हें बैठक में आने से मना कर दिया गया था.

बाद में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने मीडिया को बताया कि उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया है.

उल्लेखनीय है कि मंगलवार को ही भाजपा अध्यक्ष ने स्पष्ट कर दिया था कि पार्टी मोहम्मद अली जिन्ना के बारे में जसवंत सिंह के विचारों से सहमत नहीं है.

इस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और शिवसेना ने भी नाराज़गी ज़ाहिर की थी.

हालांकि विवाद पैदा होने के बाद जसवंत सिंह ने कहा था कि जो लोग नाराज़गी ज़ाहिर कर रहे हैं कि उन्हें उनकी किताब पढ़ लेना चाहिए क्योंकि उन्होंने जो कुछ लिखा है वह उनके अध्ययन पर आधारित है और उन्होंने किसी का महिमामंडन नहीं किया है.

निष्कासन के फ़ैसले पर अभी उनकी प्रतिक्रिया नहीं आई है.

फ़ैसला

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने शिमला में मीडिया को बताया, "संसदीय बोर्ड की बैठक में यह फ़ैसला किया गया कि जसवंत सिंह की भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समाप्त की जाती है यानी जसवंत सिंह को भारतीय जनता पार्टी से निकाला जाता है."

उन्होंने कहा, "अब वो भारतीय जनता पार्टी के किसी भी फ़ोरम के मेंबर अथवा पदाधिकारी आज की तारीख़ से और अभी से नहीं रहेंगे."

हालांकि राजनाथ सिंह ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि उनके ख़िलाफ़ जिन्ना की तारीफ़ का ही मामला था या कोई और मामला भी था.

लेकिन यह ज़ाहिर है कि उन्हें उनकी किताब में जिन्ना के महिमामंडन के कारण ही पार्टी से निकाला गया है.

राजनाथ सिंह ने बताया कि मंगलवार को ही वे जसवंत सिंह को बताना चाहते थे कि वे चिंतन बैठक के लिए शिमला न पहुँचे लेकिन तब तक वे शिमला के लिए निकल चुके थे.

उन्हें बुधवार को चिंतन बैठक शुरु होने से पहले कह दिया गया था कि वे बैठक में शामिल होने के लिए न आएँ.

इसके बाद जसवंत सिंह उस होटल के कमरे से बाहर नहीं निकले जिसमें वे मंगलवार से ठहरे हुए हैं.

भारत के वित्त और विदेश मंत्री रह चुके जसवंत सिंह को पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं में से एक माना जाता है. वे कई बरस तक राज्यसभा में संसदीय दल के नेता भी रहे हैं.

विवाद

जसवंत सिंह का पूरा विवाद उनकी किताब किताब 'जिन्ना- इंडिया, पार्टीशन, इंडिपेंडेंस' से पैदा हुआ है.

Image caption जसवंत सिंह का कहना है कि उन्होंने अपने पाँच साल के अध्ययन के आधार पर यह किताब लिखी है

इस किताब का सोमवार को नई दिल्ली में विमोचन हुआ था.

इस कार्यक्रम में भाजपा का कोई वरिष्ठ नेता शामिल नहीं हुआ था. यहां तक कि समारोह के मुख्य अतिथि बनाए गए अरुण शौरी भी नहीं आए थे.

इस किताब में जसवंत सिंह ने कहा है कि मोहम्मद अली जिन्ना को को ग़लत समझा गया.

इस किताब में भारत के विभाजन के लिए मोहम्मद अली जिन्ना को पूरी तरह ज़िम्मेदार न ठहराकर इसके लिए वल्लभ भाई पटेल, जवाहर लाल नेहरू और कांग्रेस को भी ज़िम्मेदार बताया गया है.

इस किताब से एक बार फिर वैसा ही हंगामा खड़ा हो गया था जैसा कि वर्ष 2005 में लालकृष्ण आडवाणी के बयान के बाद खड़ा हो गया था.

भाजपा के लिए एक असुविधाजनक बात यह थी कि जिस व्यक्ति को वह विभाजन के लिए ज़िम्मेदार मानती रही है उनकी पार्टी का एक वरिष्ठ नेता उसका महिमामंडन कर रहा है.

दूसरा यह कि जिस सरदार वल्लभ भाई पटेल को पार्टी अपने आदर्शों में से एक मानती रही है, उसे जसवंत सिंह ने विभाजन के लिए ज़िम्मेदार बता दिया था.

बहुत विवादों के बाद आख़िर मंगलवार को भाजपा ने जसवंत सिंह के विचारों से ख़ुद को अलग कर लिया था.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और शिवसेना ने भी उनके विचारों के प्रति नाराज़गी ज़ाहिर की थी.

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2005 में जब लालकृष्ण आडवाणी ने जिन्ना को सेक्युलर या धर्म निरपेक्ष कहा था तो भी पार्टी और आरएसएस में ऐसी ही नाराज़गी थी और इसी की वजह से आडवाणी को पार्टी अध्यक्ष के पद से हटना पड़ा था.

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