'निष्कासन कष्टप्रद लेकिन ज़रूरी'

जसवंत सिंह

शिमला में चिंतन बैठक के समापन के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि जसवंत सिंह को पार्टी से निकाला जाना कष्टप्रद है पर ऐसा करना ज़रूरी हो गया था.

पार्टी ने यह भी कहा है कि लालकृष्ण आडवाणी भारत की लोकसभा में भाजपा का नेतृत्व करते रहेंगे और उनके इस पद से मुक्त होने की ख़बरों को तथ्यहीन माना जाए.

पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा, "लालकृष्ण आडवाणी अपने पद पर बने रहेंगे. पार्टी को युवा लोगों की ज़रूरत है पर भाजपा के पास किसी भी दूसरी पार्टी से कहीं ज़्यादा युवा कार्यकर्ता और सदस्य हैं. युवाओं को मौक़ा देने के मामले में पार्टी अन्य दलों से आगे हैं."

बीते आम चुनाव में पार्टी की हार के कारणों की समीक्षा के लिए बुलाई गई चिंतन बैठक में चुनाव के दौरान पार्टी की रणनीति, परिणामों और आगे के कार्यक्रमों को लेकर विचार विमर्श हुआ.

चिंतन बैठक के फ़ैसले

राजनाथ सिंह ने बताया कि पार्टी अपनी इस बात पर क़ायम है कि चुनावों मे हार के लिए कोई व्यक्ति विशेष ज़िम्मेदार नहीं है. इसके लिए अगर किसी को ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है तो ख़ुद उन्हें.

उन्होंने कहा कि चिंतन बैठक से यह नतीजा निकला है कि पार्टी को ग़रीबों, किसानों, ग्रामीणों और मध्यमवर्ग के बीच अपनी एक सकारात्मक छवि बनाने के लिए काम करने की ज़रूरत है.

साथ ही पार्टी की विचारधारा और लोगों के व्यक्तित्व विकास पर भी काम करने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि पार्टी में यह संदेश जारी कर दिया गया है कि सभी लोगों को निजी और सार्वजनिक जीवन में एक आदर्श व्यक्तित्व पेश करना है.

राजनाथ सिंह ने यह भी दोहराया कि पार्टी में अनुशासन बहुत अहम है. इससे पीछे नहीं हटा जा सकता.

साथ ही इस बात से भी इनकार किया कि आने वाले समय में विचारधारा के स्तर पर कोई बदलाव या सुधार होने की गुंजाइश है. उन्होंने कहा कि पार्टी अपनी विचारधारा पर क़ायम है और आगे भी रहेगी.

यह पूछे जाने पर कि इस बैठक के बाद किसी बड़े बदलाव या सुधार का कोई फैसला क्यों नहीं लिया जा सका और पार्टी की बैठक के दौरान आप्टे समिति की रिपोर्ट का क्या हुआ, राजनाथ सिंह ने कहा कि जो फ़ैसले लिए गए हैं, वे भी महत्वपूर्ण हैं और आप्टे रिपोर्ट की बात पूरी तरह से ग़लत है. यह कोई रिपोर्ट नहीं थी बल्कि एक नोट था जिसमें चर्चा के बिंदुओं को ध्यान दिलाने के लिए तैयार किया गया था.

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