करोड़ों के पैकेज का आंशिक इस्तेमाल..

कश्मीर
Image caption दो दशक के चरमपंथ के बाद राज्य को 30 हज़ार करोड़ का पैकेज दिया गया था

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में पुनर्निमाण के लिए प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 30 हज़ार करोड़ रुपए के पैकेज में से अधिकाँश पैसा ख़र्च ही नहीं किया गया है.

भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में पिछले दो दशक से जारी हिंसा के चलते राज्य को हुए नुकसान और चरमराई अर्थव्यवस्था के पुनर्जीवन लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नवंबर 2004 में इस पैकेज की घोषणा की थी,

पांच साल के बाद सामने आया है कि अभी तक इस राशि में से मुश्किल से 21 फ़ीसदी पैसा ही ख़र्च हुआ है. इस पैसे को खर्च करने की समयसीमा इस साल मार्च तक थी और अब राज्य सरकार ने केंद्र से इस समयसीमा को बढ़ाने का अनुरोध किया है.

केंद्र ने 15 और राज्य ने 33 फ़ीसदी इस्तेमाल किया

प्रधानमंत्री के पैकेज को ख़र्च करने लिए तीन प्रकार की परियोजनाओं में बांटा गया था. एक राज्य परियोजनाएं, दूसरी राज्य सरकार द्वारा संचालित केंद्रीय परियोजनाएं और तीसरी केंद्र की संचालित केंद्रीय परियोजनाएं.

राज्य के वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राठर द्बारा राज्य की विधानसभा में दिए गए आंकडों से पता चलता है कि केंद्र द्बारा चलाई जाने वाली परियोजनाएं में सबसे कम ख़र्च हुआ है - यानी निर्धारित राशि में से केवल 15 प्रतिशत इस्तेमाल हो पाया है.

उधर राज्य सरकार द्वारा संचालित परियोजनाओं में से लगभग एक तिहाई राशि का उपयोग किया जा सका है.

अब्दुल रहीम राठर ने राज्य की पिछली कांग्रेस-पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी गठबंधन सरकार को निशाना बनाते हुए कहा कि इस पैकेज के इस्तेमाल न होने के लिए वो एजेंसियाँ ज़िम्मेदार हैं जिन्होंने परियोजनाओं को अंजाम देना था.

कुछ परियोजनाओं में एक पैसा ख़र्च नहीं

इस पैकेज के तहत जिन-जिन योजनाओं को चिन्हित किया गया था उनमें श्रीनगर और जम्मू - दोनों बड़े शहरों में गंदे नाले और जल-निकास के साधनों के लिए 2200 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए थे. इस राशि में से एक कौड़ी भी इस्तेमाल नहीं हुई.

इसके अलावा ग्रेटर जम्मू इलाक़े में पानी की सप्लाई की सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए निर्धारित 552 करोड़ रुपए की राशि में से भी एक पैसा नहीं ख़र्चा गया.

इसी तरह लेह और कारगिल जिलों में खाद्यान गोदामों की सुविधा के लिए दिए गए 100 करोड़ रुपए भी जस के तस पड़े रहे.

हाँ, बगलिहार पनबिजली परियोजना के लिए निर्धारित 650 करोड़ रुपयों का पूरा इस्तेमाल हुआ है, लेकिन यहाँ से पैदा की गई बिजली के संप्रेषण और वितरण के लिए दिए गए 1350 करोड़ राशि का सिर्फ 500 करोड़ ही ख़र्च किया जा सका है.

श्रीनगर की डल झील के रखरखाव के लिए निर्धारित 298 करोड़ में से सिर्फ़ 120 करोड़ रुपए ख़र्च हुए हैं.्रधानमन्त्री के पैकेज को खर्च करने लिए तीन प्रकार की परियोजनाओं में बांटा गया था. एक राज्य परियोजनाएं, दूसरी राज्यसंचालित केन्द्रीय परियोजनाएं और तीसरी केंद्रसंचालित केन्द्रीय परियोजनाएं.

राज्य के वित्त मंत्री राठेर द्बारा दिए गए आंकडों से पता चलता है, की केंद्र द्बारा चलाई जाने वाली परियोजनाएं सबसे कम कारगर रहीं हैं. जबकि राज्यसंचालित परियोजनाओं में लगभग एक तिहाई राशि का उपयोग किया जा सका है.

और केंद्रसंचालित परियोजनाओं में मात्र पंद्रह फीसदी राशि का उपयोग हो पाया है. केंद्र द्बारा चलाई जाने वाली परियोजनाओं में लगभग 16 हज़ार करोड़ की लागत वाली 7 पनबिजली परियोजनाएं शामिल थीं.

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