दिमाग़ी बुखार का दायरा बढ़ा

अस्पताल
Image caption उत्तर प्रदेश के पूर्वी ज़िलों में दिमागी बुखार की समस्या पिछले तीन दशक से है.

उत्तर प्रदेश में इंसेफ़्लाइटिस यानी दिमाग़ी बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है. इसका केंद्र गोरखपुर और उसके आसपास के ज़िले हैं.

अभी तक उत्तर प्रदेश में दिमाग़ी बुखार के कारण 200 बच्चों की मौत हो चुकी है और 900 से ज़्यादा बच्चों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में हो रहा है.

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के डॉक्टर केपी कुशवाहा ने बताया कि अस्पताल में दिमाग़ी बुखार से पीड़ित बच्चों की हालत ख़राब है, क्योंकि अस्पताल में डॉक्टर, नर्सों और अन्य चिकित्सा सुविधाओं की कमी है.

साथ ही आस पास के ज़िलों के लोग अपने बच्चों को लेकर इसी अस्पताल में आ रहे हैं, जिससे यहाँ भीड़ हो गई है.

देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज जैसे सुदूर इलाक़ों से बच्चों को गोरखपुर अस्पताल तक लाने में भी जो समय लगता है, उससे बीमार बच्चों की हालत और भी ख़राब हो जाती है.

अब डॉक्टर यह सलाह दे रहे हैं कि ऐसे बच्चों को पास के ही किसी स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक इलाज के लिए पहले भर्ती कराया जाना चाहिए ताकि समय रहते उन्हें आवश्यक ऑक्सीजन और अन्य सुविधाएँ मिल सके.

उत्तरप्रदेश के स्वास्थ्य महानिदेशक डॉक्टर भारती ने बताया है कि इस बुखार के लिए ज़िम्मेदार वायरस का पता लगाने के लिए राज्य के वायरस विशेषज्ञ डॉक्टर गोरखपुर पहुँच गए है क्योंकि पता चला है कि कई बच्चों में इस बुखार का कारण कुछ नए वायरस हो सकते हैं.

संबंधित समाचार