हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ इंटरपोल नोटिस

हाफ़िज़ सईद
Image caption हाफ़िज़ सईद की मुंबई पर हुए चरमपंथी हमलों में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को तलाश है.

जमात उद दावा के प्रमुख हाफ़िज़ मोहम्मद सईद के नाम इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सीबीआई ने मुंबई हमले के सिलसिले में आरोपपत्र के आधार पर इंटरपोल से नोटिस जारी करने का आग्रह किया था.

समाचारपत्र हिंदुस्तान टाइम्स ने सीबीआई के प्रवक्ता हर्ष भाल के हवाले से लिखा है कि 'इंटरपोल ने मुंबई हमलों के सिलसिले में रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है और अब वो जहाँ भी होंगे उस देश की सरकार क़ानूनी रूप से उन्हें गिरफ़्तार कर भारत को सौंपने के लिए बाध्य होगी.'

इस नोटिस के जारी होने से पाकिस्तान के लिए हाफ़िज़ सईद को आज़ाद छोड़ना मुश्किल हो जाएगा.

इसके पहले पाकिस्तान ने स्पष्ट कर दिया था कि वो जमात उद दावा के प्रमुख हाफ़िज़ मोहम्मद सईद को मुंबई हमलों के आरोप में गिरफ़्तार नहीं कर सकता क्योंकि उन के ख़िलाफ़ किसी तरह का सबूत नहीं है.

पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक का कहना था कि सईद को केवल उन बयानों के आधार पर गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता जिनमें उन्हें मुंबई हमलों से जोड़ा गया है.

हाफ़िज़ मोहम्मद सईद की मुंबई पर हुए चरमपंथी हमलों में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को तलाश है.

मुंबई हमलों के बाद संयुक्त राष्ट्र ने जमात उल दावा को 'आतंकवादी संगठन' घोषित कर दिया था जिसके बाद पाकिस्तान में इस संगठन पर कार्रवाई शुरू कर दी गई थी.

गिरफ़्तारी और रिहाई

इसके तहत 12 दिसंबर, 2008 हाफ़िज़ मोहम्मद सईद और उनके कुछ सहयोगियों को एक महीने के लिए उनके घर में ही नज़रबंद कर दिया गया था, बाद में नज़रबंदी की मियाद बढ़ा दी गई थी.

क़रीब छह महीने की नज़रबंदी के बाद सईद को लाहौर हाई कोर्ट के निर्देश पर दो जून को रिहा कर दिया गया था.

हाई कोर्ट ने सईद की रिहाई के आदेश देते हुए कहा था कि सरकार उनके मुंबई हमलों में शामिल होने का कोई सबूत नहीं दे पाई है.

सईद चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा के संस्थापक हैं. उन्होंने 2001 में लश्कर का नेतृत्व छोड़कर जमात उद दावा की कमान संभाल ली थी.

जमात उद दावा को एक इस्लामी कल्याणकारी संस्था बताया जाता है लेकिन भारत का आरोप है कि लश्कर पर पाबंदी के बाद चरमपंथी कार्रवाइयों के लिए इस संस्था का इस्तेमाल किया जाने लगा है.

हालाँकि सईद ने कहा था कि वे एक कल्याणकारी संस्था चलाते हैं जिसका मुंबई के हमलों से कोई लेना देना नहीं है.

लेकिन भारत का कहना है कि जमात उद दावा असल में लश्करे तैबा का ही बदला हुआ नाम है.

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