संथानम की टिप्पणी पर बवाल

पोखरण-II
Image caption के संथानम पोखरण-II के आयोजन में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की ओर से सक्रिय थे

भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के परमाणु वैज्ञानिक के संथानम की मई 1998 के भारतीय परमाणु परीक्षणों के पूरी तरह से सफल न होने की टिप्पणी पर विभिन्न राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई है.

परमाणु वैज्ञानिक के संथानम 11 और 13 मई 1998 को किए गए पाँच परमाणु परीक्षणों के दौरान राजस्थान में पोखरण में मौजूद थे.

उन्होंने भारत के अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए साक्षात्कार में कहा है, "विश्व भर में विशेषज्ञों ने जो अनुमान लगाए हैं, उससे स्पष्ट है कि एक मात्र थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस के धमाके से निकलने वाली ऊर्जा दावों से कहीं कम थी. इसीलिए मैं ज़ोर देकर कह रहा हूँ कि भारत को परमाणु परीक्षण निषेध संधि(सीटीबीटी) पर हस्ताक्षर करने में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए."

समाचार एजेंसियों के अनुसार भारत के नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुरीश मेहता ने कहा, "जहाँ तक हमारा सवाल है, हम वैज्ञानिकों के विचारों के मुताबिक चलते हैं. उन्होंने हमें एक क्षेत्र में सक्षम होने के प्रमाण दिए हैं."

समाचार एजेंसियों के अनुसार इस पर गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा, "मैंने ये रिपोर्ट देखी है. मुझे ये देखकर हैरत हुई है. सरकार इस बारे में पता लगाएगी..."

इसके बाद भारतीय टीवी चैनल के साथ बातचीत में वाजपेयी सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे ब्रजेश मिश्र ने भी के संथानम की टिप्पणी पर आपत्ति जताई है.

ब्रजेश मिश्र कहा कि उस समय डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम वैज्ञानिक सलाहकार थे और उनका मानना था कि 1998 के पोखरण परीक्षण पर्याप्त हैं और संथानम सीधे उन्हीं के साथ काम कर रहे थे, तो परीक्षण के किसी भी सवाल का जवाब तो स्पष्ट है.