'आडवाणी का इस्तीफ़ा ठीक रहता'

जसवंत सिंह
Image caption जसवंत सिंह को अभी भी भाजपा से लगाव है.

भारत के पूर्व विदेश मंत्री और हाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से निष्कासित किए गए नेता जसवंत सिंह ने कहा है कि लाल कृष्ण आडवाणी को इस्तीफ़ा देने के अपने फ़ैसले पर कायम रहना चाहिए था.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "यदि आडवाणी अपने इस्तीफ़े पर कायम रहते तो उन्हें भी और भारतीय जनता पार्टी को भी इस निर्णय से नैतिक बल मिलता.”

हालाँकि सीधे सवाल के जवाब में उन्होंने इस बात का खंडन किया कि भाजपा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के क़रीबी नेताओं ने एक साथ भाजपा के मौजूदा नेतृत्व पर धावा बोला है.

जसवंत सिंह का कहना था, “अटल जी ने कभी खेमे नहीं बनाए और न ही पार्टी में कोई खेमे हैं. यह एक और भार है जो भाजपा ने अपने कंधों पर ले लिया है. मैं इस बात का खंडन करता हूँ कि कोई सोचा-समझा धावा बोला जा रहा है. मेरी ब्रजेश मिश्र या फिर यशवंत जी से कोई बात नहीं हुई. जो एकरुपता दिख रही है, वह केवल मीडिया की ही है.”

भाजपा से निष्कासन के बाद भी जसवंत सिंह ने कहा है कि उनका पार्टी से लगाव बना हुआ है.

जब जसवंत सिंह से भाजपा में हाल फ़िलहाल के घटनाक्रम और पार्टी नेतृत्व के बारे में पूछा गया तो उन्होंने खेद जताया कि उन्हें ‘पार्टी से धक्का दिया गया.’

उनका कहना था, “मैं तीस साल तक भाजपा में था. वह मेरा राजनीतिक घर था जिससे मुझे बाहर निकाला गया है. कोई बात नहीं, जो किस्मत में हो. जो भाजपा का मौजूदा स्वयंभू नेतृत्व या नेतृत्व का अभाव है, उसे इन मामलों की सुध लेनी चाहिए. मैं अब उस घर से बाहर हूँ और इन मामलों में उलझना नहीं चाहता.”

जसवंत सिंह ने कहा कि, "जिन लोगों ने हमारे लिए अपने दरवाज़े बंद कर दिए वे आज और लोगों से अपने दिमाग के खिड़की दरवाज़े खोलने की बात कह रहे हैं."

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