टैमीफ़्लू हो सकता है बेअसर

टैमीफ़्लू
Image caption चीन और सिंगापुर समेत 12 देशों से मरीजों पर टैमीफ़्लू का असर न होने की ख़बर है.

विश्व स्वास्थ संगठन का कहना है कि टैमीफ़्लू के बेजा इस्तेमाल से एच1एन1 वायरस में दवा के लिए प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न हो सकती है.

संगठन के अनुसार ऐसा होना बीमारी के इलाज के लिए घातक होगा.

विश्व स्वास्थ संगठन ने भारत को चेतावनी दी है कि वहाँ लोगों को दवा फांकने या चिकित्सकों के ज़रिए बताई गई दवा पूरी न खाने की आदत आम है.

अपनी चेतावनी में संगठन ने कहा है कि चीन और सिंगापुर समेत 12 देशों से मरीज़ों पर टैमीफ़्लू के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने की बात सामने आई है.

विशेषज्ञों के अनुसार अपनी क्षमता में लगातार तब्दीली इफ्लूएंज़ा वायरस का ख़ास लक्षण है.

लक्षण

अक्सर फ़्लू वायरस में एक से दूसरा मौसम आते आते बदलाव के लक्षण आ जाते हैं. कभी-कभी ऐसा एक मौसम के दौरान ही हो जाता है.

उत्पन्न हुए कुछ नए लक्षणों की वजह से वायरस के अंदर इलाज के लिए इस्तेमाल दवाइयों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के औषधि विभाग के प्रमुख डॉक्टर वाईके गुप्ता इसकी व्याख्या करते हुए कहते हैं, "वायरस में दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता इसलिए उत्पन्न हो जाती है क्योंकि वायरस दवा को एक तरह से मार देता है या उसके साथ रहना सीख जाता है."

उनका कहना है कि इंफ़्लूएंज़ा वायरस मरीज़ के शरीर में अपने जैसे और वायरस पैदा करने की भी क्षमता रखता है.

भारत में स्वाइन फ़्लू का दायरा बढ़ता ही जा रहा है. प्रतिदिन इसके नए मामले सामने आ रहे हैं. अब तक इस बीमारी से मरनेवालों की संख्या 90 को पार कर चुकी है.

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