खाद्यान्न भंडार पर्याप्त: मनमोहन

मनमोहनसिंह
Image caption प्रधानमंत्री ने योजना आयोग की बैठक शुरु की

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि अर्थव्यवस्था के बारे में ज़्यादा निराश होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि वैश्विक वित्तीय संकट का असर अब कम हो रहा है.

उन्होंने मंगलवार को नई दिल्ली में योजना आयोग की बैठक में कहा कि सूखे जैसी स्थिति से भी आसानी से निपटा जा सकता है.

उनका कहना था, "सूखे का जो भी असर हो, उससे निपटने के लिए हम बहुत मज़बूत स्थिति में हैं. हमारा खाद्यान्न भंडार ख़ास तौर पर काफ़ी है. हमें ज़्यादा निराश नहीं होना चाहिए."

भारत के पास पाँच करोड़ टन खाद्यान्न भंडार है जो 13 महीनों की ज़रूरत पूरी कर सकता है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती और सूखे के असर को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता लेकिन अर्थव्यवस्था की आंतरिक मज़बूती इससे निपटने में सक्षम है.

उन्होंने कहा कि अभी पूरा ध्यान सूखा प्रबंधन पर दिया जा रहा है ताकि रबी की फ़सल सामान्य हो और ख़रीफ़ की फ़सल की बुआई में कोई असर नहीं पड़े.

निवेश को बढ़ाने के लिए मनमोहन सिंह ने निजी क्षेत्र के साथ साझीदारी पर ज़ोर दिया और कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और शहरी विकास के क्षेत्र में भी इस तरह की साझीदारी हो सकती है.

आर्थिक स्थिति का आकलन

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछला एक साल अर्थव्यवस्था के लिए कठिन रहा है और मानसून भी कमज़ोर रहा, पर अब हालात सुधरने लगे हैं.

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना की मध्यावधि समीक्षा के लिए आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि योजना आयोग विभन्न मंत्रालयों को आर्थिक स्थिति का एक पूरा आकलन प्रस्तुत करे.

अपने शुरुआती संबोधन में प्रधानमंत्री ने बैठक में अर्थव्यवस्था का आकलन और समग्र उर्जा नीति का मुद्दा उठाया जिस पर विस्तृत चर्चा हुई.

उन्होंने कहा कि भारत अपनी पेट्रोलियम ज़रुरतों का 70 प्रतिशत आयात से पूरा करता है, दूसरी ओर बिजली के लिए भी भारत कोयला पर बहुत निर्भर है जिसका भंडार सीमित है.

उन्होंने कहा, "इसके अलावा जलवायु परिवर्तन को लेकर भी ऊर्जा नीति की समीक्षा की ज़रुरत है. समग्र उर्जा नीति को मंत्रिमंडल ने दिसंबर 2008 में मज़ूरी दे दी थी."

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