पोखरण-2 पर बढ़ा अंतर्विरोध

पोखरण-II
Image caption पोखरण-2 के तहत पाँच परीक्षण किए गए थे.

पोखरण में 1998 में किए गए परमाणु परीक्षणों की सफ़लता पर वैज्ञानिकों के बीच अंतर्विरोध बढ़ता ही जा रहा है.

अब जाने-माने परमाणु वैज्ञानिक एचएन सेठना ने इन परीक्षणों की सफलता पर सवाल उठाए हैं.

सबसे पहले भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के परमाणु वैज्ञानिक के संथानम ने कहा था कि मई 1998 के परमाणु परीक्षण पूरी तरह सफल नहीं थे और इसलिए भारत को परमाणु परीक्षण निषेध संधि (सीटीबीटी) पर दस्तख़त करने की जल्दबाज़ी नहीं दिखानी चाहिए.

उनके इस दावे का पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने खंडन किया था. 1998 में भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार रहे अब्दुल कलाम ने पोखरण-2 परीक्षणों को पूरी तरह सफल बताया था.

इस बीच परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व प्रमुख पीके आयंगर ने बीबीसी से कहा है कि इन परीक्षणों से अपेक्षित नतीजे नहीं निकल सके. उन्होंने के संथानम के विचारों का समर्थन किया कि भारत को अभी और परीक्षण करने की ज़रूरत है.

हाइड्रोजन बम पर बहस

भारत ने 11 और 13 मई 1998 को पाँच परमाणु परीक्षण किए थे. इनमें से एक थर्मो न्यूक्लियर डिवाइस यानी हाइड्रोजन बम का परीक्षण था.

सारा विवाद इसी एक परीक्षण को लेकर है. पीएम आयंगर का कहना है, "अगर थर्मो न्यूक्लियर डिवाइस को किसी मिसाइल, जंगी विमान या पनडुब्बी के ज़रिए इस्तेमाल करने का सवाल है तो भारत को अभी कई और परीक्षण करने की ज़रूरत है."

मंगलवार को परमाणु ऊर्जा आयोग के ही पूर्व अध्यक्ष और 1974 में पोखरण में ही किए गए पहले परमाणु परीक्षण के सूत्रधार रहे एचएन सेठना ने भी संथानम के विचारों का समर्थन किया है.

साथ ही उन्होंने परीक्षणों को सफल बताने के लिए पूर्व राष्ट्रपति कलाम की आलोचना भी की है. उनका कहना है, "कलाम को विस्फोट में निकलने वाली ऊर्जा के बारे में क्या पता है? वो कुछ भी नहीं जानते."

इन विवादों के बाद भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी एपीजे अब्दुल कलाम के बयान का हवाला देकर कहा था कि परमाणु परीक्षण पूरी तरह सफल रहे थे.

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