हादसों के शिकार हुए कई कद्दावर नेता

आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता वाईएसआर राजशेखर रेड्डी हेलिकॉप्टर दुर्घटना के शिकार हुए हैं. राजशेखर रेड्डी समेत पांच लोग बुधवार को हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए हैं.

इसे भारतीय राजनीति का दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि कई अहम और करिश्माई राजनेताओं को हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं का शिकार होना पड़ा है. हादसा ऐसा कि इनमें से कोई भी ज़िंदा नहीं बचा. कांग्रेस नेता संजय गांधी, माधव राव सिंधिया, ओपी जिंदल, जीएमसी बालयोगी का नाम इस सूची में शामिल है.

सबसे ज़्यादा विवाद और चर्चा में रहा संजय गांधी के विमान का दुर्घटनाग्रस्त होना. इंदिरा गांधी के बड़े बेटे और राजीव गांधी के भाई संजय गांधी का विमान 23 जून, 1980 को दिल्ली में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. वे अपना विमान खुद उड़ा रहे थे.

माधवराव सिंधिया को कांग्रेस के अग्रणी नेताओं में शुमार किया जाता था. उनकी गिनती उन नेताओं में की जाती थी जो कमोबेश युवा थे और लोगों के बीच लोकप्रिय थे. राजनीतिक हल्कों में माना जाता था कि कांग्रेस में उनका भविष्य काफ़ी उज्जवल है.

सितंबर 2001 में वे कांग्रेस की एक रैली को संबोधित करने कानपुर जा रहे थे. उसी दौरान मैनपुरी ज़िले में उनका छोटा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और माधवराव सिंधिया की मौत हो गई है. विमान में पांच पत्रकार भी थे.

कांग्रेस के युवा नेता माने जाने वाले राजेश पायलट भी एक सड़क दुर्घटना में मारे गए थे. तीन मार्च 2004 को तत्कालीन लोक सभा स्पीकर जीएमसी बालयोगी की मौत भी हेलिकॉप्टर दुर्घटना में ही हुई थी. ये दुर्घटना आंध्रप्रदेश में हुई वे तेलगु देसम पार्टी के सदस्य थे.

वर्ष 2007 में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता साहिब सिंह वर्मा की भी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. यह हादसा अलवर-दिल्ली राजमार्ग पर हुआ था.

करिश्मे भी हुए

2005 में ऐसी ही एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना ने दो नेताओं को अपना शिकार बनाया. राजनेता और उद्योगपति ओपी जिंदल और पूर्व मुख्यमंत्री बंसी लाल के बेटे सुरिंदर सिंह चंडीगढ़ से दिल्ली लौट रहे थे जब हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी.

ओपी जिंदल उस समय हरियाणा के ऊर्जा मंत्री थे और देश के अग्रणी उद्योगपतियों में उनकी गिनती होती थी. उस साल फ़ोर्ब्स ने जिंदल को विश्व का 548वां सबसे धनी व्यक्ति बताया था.

इसके अलावा कई ऐसी हेलिकॉप्टर दुर्घटनाएँ भी हुईं जिनमें कई राजनेता बस बाल-बाल बचे.

पीछे मुड़कर नज़र डालें तो 1977 का मामला याद आता है जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई विमान हादसे में बाल-बाल बचे थे. वे कुछ अन्य नेताओं के साथ विमान के ज़रिए पूर्वोत्तर के दौरे पर जा रहे थे जब विमान असम में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. पायलटों ने हेलिकॉप्टरों को खेत में कुछ इस तरह उतारा कि सबसे ज़्यादा नुकसान कॉकपिट को हुआ और पीछे का हिस्सा बच गया जिसमें प्रधानमंत्री थे.

इस तरह मोरारजी देसाई और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री समेत दूसरे नेता तो बच गए लेकिन भारतीय वायु सेना के पांच लोगों को जान गंवानी पड़ी.

वर्ष 2001 में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. राँची में हुए इस हादसे में सभी लोग सकुशल बच गए थे.

जुलाई 2003 में उद्योगपति विजय मालया का हेलिकॉप्टर भी दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. उड़ान के दौरान पाइलट का हेलिकॉप्टर पर से कोई नियंत्रण नहीं रहा था. उस समय वे जनता पार्टी के नेता थे.

इसे करिश्मा ही कहा जा सकता है कि सभी लोगों की जान बच गई. हेलिकॉप्टर में फ़िल्म अभिनेता संजय खान भी थे.

सितंबर 2006 में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह भी इसी तरह बाल-बाल बचे थे. वे गुरदासपुर जा रहे थे जब उनका पवन हंस हेलिकॉप्टर हाई टेंशन लाइन में जाकर फँस गया. उन्होंने बाद में खुद कहा था कि ऐसी स्थिति में ज़िंदा बचना करिश्मे के जैसा है.

लेकिन ऐसे करिश्मे कभी-कभार ही देखने को मिलते हैं.

बुधवार, 02 सितंबर 2009 की सुबह जब वाईएस राजशेखर रेड्डी का हेलिकॉप्टर लापता हुआ था तो लोग पहले उम्मीद करते रहे कि कहीं सुरक्षित उतर गया होगा.

समय गुज़रता गया तो लोगों को उम्मीद थी कि अगर हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो भी गया है तो शायद मुख्यमंत्री सुरक्षित होंगे.

लेकिन गुरुवार सुबह होते-होते ये स्पष्ट हो गया कि हेलिकॉप्टर में उड़ान भर रहे सभी लोगों की मौत हो गई है.

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