जगन गिरफ़्तार, कांग्रेस की परेशानी बढ़ी

वाईएसआर रेड्डी
Image caption वाईएसआर की मृत्यु पिछले साल सितंबर में हुई थी

विवादों में घिरे कांग्रेस सांसद जगनमोहन रेड्डी को शुक्रवार पुलिस ने उस समय हिरासत में ले लिया जब वो ट्रेन से वारंगल ज़िले के दौरे पर जा रहे थे.

पुलिस ने यह क़दम उस समय उठाया जब वारंगल के महबूबाबाद रेलवे स्टेशन पर जगन के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसक झड़प हुई और फ़ायरिंग में एक व्यक्ति की मौत हो गई और नौ घायल हो गए. भड़की हुई भीड़ ने कई वाहनों को आग लगा दी और वारंगल जिले में बंद की घोषणा कर दी.

जगनमोहन की ‘दिलासा यात्रा’ उस समय से विवादों में घिरी है जब से तेलंगाना राज्य के समर्थकों ने जगन पर तेलंगाना विरोधी होने का आरोप लगाते हुए उन की यात्रा का विरोध शुरु कर दिया था. उन्हें चेतावनी भी दी गई थी की अगर उन्होंने ‘तेलंगाना की भूमि पर क़दम रखा तो उसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे.’

जगन ने अपनी इस यात्रा का यह कहते हुए बचाव किया है कि कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य उन परिवारों को धीरज बंधाना है जिनके सदस्यों को उनके पिता मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की मौत से बहुत दुख पहुँचा और उनकी मौत हो गई थी.

वारंगल में अपनी एक सप्ताह लंबी यात्रा में वो ऐसे 77 परिवारों से मिलने वाले थे लेकिन लेकिन तेलंगाना के समर्थक जगनमोहन के विरोध करने पर अड़े रहे.

कांग्रेस नेताओं, सांसदों का अनुरोध ठुकराया

हालात को बिगड़ता देखकर कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं और तेलंगाना के 11 सांसदों ने पार्टी आला कमान से अनुरोध क्या था की वो जगन को यात्रा करने से रोके.

गुरुवार को कांग्रेस के महासचिव वीरप्पा मोइली और राज्य के कई मंत्रिओं ने जगन से कहा भी के वो यात्रा टाल दें क्योंकि इससे तेलगाना की शांति भंग हो सकती है. लेकिन इस सब को अनदेखा करते हुए जगन ने शुक्रवार को वारंगल जाने की कोशिश की.

Image caption वाईएसआर रेड्डी की मृत्यु के बाद उनके समर्थकों ने जगनमोहन को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की थी

जैसे ही यह खबर फैली की जगन ट्रेन में सवार हो गए हैं, महबूबनगर में झडपें शुरू हो गईं और उनके समर्थकों और विरोधियों ने एक दूसरे पर पत्थर बरसाए. जगन के सैकड़ों विरोधियों ने रेलवे स्टेशन की संपत्ति को क्षति पहुँचाई.

झड़पों के दौरान फ़ायरिंग

उन्होंने उस वेटिंग हॉल पर भी पत्थराव क्या जहाँ कांग्रेस की दो विधायक कोंडा सुरेख और कविता और कोंडा सुरेख के पति मुरली बैठे हुए थे. जब पथराव में कविता घायल हो गईं तो उनके अंगरक्षकों ने भीड़ पर गोली चला दी जिसमें नौ लोग घायल हो गए और एक की मृत्यु हो गई.

जैसे ही हिंसा की खबर फैली, पुलिस ने उस ट्रेन को रास्ते में ही रोक दिया जिसमें जगन यात्रा कर रहे थे. तीन घंटे बाद पुलिस ने जगन को हिरासत में ले लिया और उन्हें हैदराबाद वापस भेज दिया.

इधर कोंडा सुरेखा ने जगन की गिरफ़्तारी पर नाराज़ होकर नींद की गोलिया खालीं और आत्माहत्या का प्रयास किया लेकिन पुलिसे ने उन्हें तुरंत अस्पताल भिजवा दिया.

इन घटनाओं के बाद राज्य में कई स्थानों पर हिंसा और विरोध प्रदर्शन हुए. जगन के समर्थकों ने एक ट्रेन की दो बोगियों को आग लगा दी और कई जगहों पर दूकाने बंद करवाईं. गुंटूर, विजयवाडा, अनंतपुर, विशाखापत्तनम में उन्होंने विरोध प्रदर्शन किए, रास्ता रोको आयोजित क्या और अलग तेलंगाना राज्य बनाए जाने का समर्थन कर रहे नेताओं के पुतले जलाए.

उधर तेलंगाना समर्थक संगठनों ने भी शनिवार को तेलंगाना बांध का आहवान क्या है. यह बंद और जगन के विरोध में बलाया गया है.

इन घटनाओं का आंध्र प्रदेश में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर भी असर पड़ सकता है. पार्टी में क्षेत्रीयता के आधार पर फूट बढ़ सकती है. राजशेखर रेड्डी की पिछले साल सितंबर में हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत के बाद उनके समर्थक जगन को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे थे लेकिन कांग्रेस आला कमान ने उसे रद्द करते हुए रोसैया को मुख्यमंत्री बना दिया.

इस संदर्भ में जगन की इस ‘दिलासा यात्रा’ को आम लोगों से जुड़ने और जनसंपर्क को मज़बूत करने और अपनी स्थिति को शक्तिशाली बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन हो सकता है कि कांग्रेस आला कमान की बात न सुनकर जगन ने अपनी परेशानी बढ़ा ली हो.

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