बवाल के बीच मंत्रिमंडल ने शपथ ली

आंध्र प्रदेश

वाईएस राजशेखर रेड्डी के निधन के बाद आंध्र प्रदेश में राजनीतिक बवाल मचा हुआ है.

हाई कमान के दखल के बाद मुख्यमंत्री के रोसैया के नेतृत्व में नए मंत्रिमंडल ने भी शपथ ले ली है, लेकिन अंदर ही अंदर विरोध के स्वर सुनाई देने पड़े हैं.

इसका नज़ारा उस समय देखने को मिला, जब राजशेखर रेड्डी की श्रद्धांजलि सभा राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गई.

हैदराबाद में प्रदेश कांग्रेस ने इस श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया था. लेकिन इस सभा में जमकर नारेबाज़ी हुई.

बड़ी संख्या में मौजूद कार्यकर्ताओं ने जगन मोहन रेड्डी के पक्ष में और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी श्रीनिवास के विरोध में नारे लगाए.

नारेबाज़ी

स्थिति इतनी अजीब हो गई कि डी श्रीनिवास अपना भाषण बीच में ख़त्म करके वहाँ से रवाना हो गए. इसके बाद मुख्यमंत्री के रोसैया, केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी और पूर्व मुख्यमंत्री एन भास्कर राव भी बिना भाषण दिए चले गए.

राजशेखर रेड्डी के क़रीबी मित्र और सलाहकार डॉ. केवीपी रामचंद्र राव और वाईएसआर के छोटे भाई वाईएस विवेकानंद रेड्डी ने समर्थकों से अपील की कि वे संयम बनाए रखें.

लोगों को समझाते-समझाते और वाईएसआर की याद में रामचंद्र राव कई बार भावुक हो गए. उन्होंने लोगों को समझाया कि जल्दबाज़ी में की गई किसी भी कार्रवाई से जगन मोहन रेड्डी का ही नुक़सान हो रहा है.

उन्होंने कहा, "पार्टी हाईकमान हर चीज़ जानता है. जगन मोहन रेड्डी के मुद्दे पर सोनिया गांधी उचित फ़ैसला करेंगी. आप लोग नकारात्मक क्यों सोच रहे हैं?"

चेतावनी

जगन मोहन रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग को लेकर चलाए जा रहे अभियान के बीच रविवार को के रोसैया के नेतृत्व में मंत्रिमंडल ने शपथ ले ली.

Image caption जगन मोहन रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग हो रही है

राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी ने सभी मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. पहले राजशेखर रेड्डी के मंत्रिमंडल में शामिल कई मंत्रियों ने धमकी दी थी कि वे शपथ नहीं लेंगे.

कुछ ने तो कहा था कि वे जगन मोहन रेड्डी के साथ ही शपथ लेंगे. लेकिन हाई कमान की चेतावनी के बाद राजशेखर रेड्डी मंत्रिमंडल में शामिल सभी 34 मंत्रियों ने शपथ ली.

इन मंत्रियों के विभागों में कोई फेरबदल नहीं हुआ है. सभी मंत्रियों ने एक साथ शपथ ली. लेकिन वे काफ़ी नाराज़ दिख रहे थे.

ज़ाहिर है ये नाराज़गी आने वाले समय में प्रदेश कांग्रेस के साथ-साथ पार्टी हाई कमान के लिए भी सिरदर्द साबित हो सकती है.

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