मूर्ति लगाने की योजना पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार उत्तर प्रदेश में मूर्ति स्थापना का काम शुरु करने पर मायावती सरकार के प्रति नाराज़गी जताई है.उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया है कि जब तक अदालत इस बारे में फ़ैसला नहीं कर लेती मूर्ति स्थापना का काम रोक दिया जाएगा.

सुनवाई के दौरान जस्टिस बीएन अग्रवाल और आफ़ताब आलम की बेंच ने इस बात पर ग़ौर किया कि क्या लोगों के खर्चे पर सरकार इस तरह का बड़ा निर्माण कार्य कर सकती है.

उत्तर सरकार ने दलील दी थी कि करीब 2600 करोड़ वाली लागत की इस योजना को कैबिनेट की मंज़ूरी मिली हुई है. लेकिन कोर्ट ने कहा कि वो इस फ़ैसली की क़ानूनी वैधता पर विचार करेगा.

सरकार को अपना उत्तर देने के लिए 24 सितंबर तक का समय दिया गया है और अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी.

उत्तर प्रदेश सरकार ने मायावती और बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशी राम समेत कई नेताओं की मूर्ति स्थापित करने की योजना तैयार की थी जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया था.

इसके बाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी. जब ये मामला सुनवाई के लिए अदालत में पहुँचा था तो 'जल्दबाज़ी' में मायावती ने राजधानी लखनऊ में 15 स्मारकों, पार्कों, चौराहों, मैदानों का उदघाटन कर दिया था.

लखनऊ भर में फैले इन स्मारकों में मुख्य है बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल. इसके अलावा राजधानी भर में 14 और स्मारक, पार्क, चौराहे, गैलरी आदि बनवाई गई हैं.

हज़ारों करोड़ की लागत से बने इन स्मारकों में बाबासाहेब अंबेडकर और कांशीराम के अलावा मायावती की भी तीन प्रतिमाएं हैं.

हालांकि मायावती ने उदघाटन के वक़्त दिए गए अपने संबोधन में कहा था कि देश में इससे पहले भी इतनी बड़ी लागत के स्मारक बनते रहे हैं, राजघाट के लिए तो कभी सवाल नहीं उठाया गया तो फिर दलितों के सम्मान से जुड़े स्मारकों पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं.