तमांग रिपोर्ट पर उच्च न्यायालय की रोक

इशरत जहाँ का शव
Image caption इशरत जहाँ को आतंकवादी बताया गया था

गुजरात हाई कोर्ट ने इशरत जहाँ मामले पर मैजिस्ट्रेट तमांग की रिपोर्ट पर रोक लगा दी है जिसमें इशरत जहाँ की मुठभेड़ को फ़र्ज़ी बताया गया था.

कुछ दिन पहले जस्टिस तमांग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें कहा गया था कि 15 जून 2004 को अमजद, ज़ीशान, जावेद और इशरत जहाँ की फ़र्ज़ी मुठभेड़ मे हत्या कर दी गई थी.

लेकिन गुजरात सरकार ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए इसकी वैधता पर सवाल उठाए थे.

स्थानीय पत्रकार महेश लांगा ने बीबीसी को बताया, "गुजरात सरकार ने हाई कोर्ट से अपील की थी कि तमांग रिपोर्ट पर रोक लगाई जाए. जस्टिस कलपेश झावेरी ने रोक लगाते हुए कहा कि रिपोर्ट में जो बातें उठाई गई हैं वो न्यायिक मैजिस्ट्रेट के कार्यक्षेत्र से बाहर थीं."

मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी.

पत्रकार महेश लांगा के मुताकि हाई कोर्ट ने इशरत की माँ को इस बात की अनुमति दी है कि वो ये रिपोर्ट हाई कोर्ट द्वारा गठित जाँच समिति को सौंप सकती है.

गुजरात पुलिस की अपराध शाखा ने 15 जून 2004 को अमजद, ज़ीशान, जावेद और इशरत जहाँ को मार दिया था. गुजरात पुलिस का दावा था कि ये चारों आतंकवादी थे और पुलिस ने इन्हें मुठभेड़ में मार दिया है.

पर मैजिस्ट्रेट एसपी तमांग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ये मुठभेड़ फ़र्ज़ी थी. इशरत की माँ की याचिका पर मामले की जाँच के लिए समिति गठित की गई थी.

मामला

लेकिन मंगलवार को गुजरात सरकार ने इस रिपोर्ट की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे खारिज कर दिया था. गुजरात सरकार के प्रवक्ता जय नारायण व्यास ने अहमदाबाद में पत्रकार वार्ता की थी और कहा था कि ये रिपोर्ट जल्दबाज़ी में तैयार की गई है और इसमें सभी क़ानूनी पहलुओं का ध्यान नहीं रखा गया है.

उन्होंने कहा था कि जिन लोगों पर आरोप लगाए गए थे उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौक़ा नहीं दिया गया.

गुजरात पुलिस ने 2004 में दावा किया था कि उसे ख़ुफ़िया सूचना थी कि लश्कर-ए-तैबा का आत्मघाती दस्ता मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के इरादे से शहर में पहुँचा है.

पुलिस का दावा था कि ये 'आतंकवादी' शहर में घुस रहे थे तभी पुलिस ने इन्हें घेर लिया और फिर गोलीबारी शुरू हो गई और चार आतंकवादी मारे गए.

पुलिस ने यह भी कहा था कि इनमें से दो चरमपंथी पाकिस्तानी नागरिक थे. पुलिस की टीम का नेतृत्व डीजी वनज़ारा कर रहे थे. इस समय वे सोहराबुद्दीन फ़र्जी मुठभेड़ मामले में पुलिस हिरासत में हैं.

लेकिन अहमदाबाद की मेट्रोपोलिटन अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि गुजरात पुलिस ने ये हत्या की है. अदालत ने अपनी कड़ी टिप्पणी में कहा कि इस हत्या में शामिल गुजरात पुलिस के अधिकारियों ने निजी लाभ के लिए ऐसा किया है.

संबंधित समाचार