दाढ़ी मामले में स्कूल को नोटिस

मोहम्मद सलीम
Image caption सलीम ने दाढ़ी रखने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने एक मुस्लिम छात्र के दाढ़ी रखने के अधिकार के मामले में मध्यप्रदेश के निर्मला कान्वेंट स्कूल को एक नोटिस जारी किया है.

इस छात्र मोहम्मद सलीम को दाढ़ी रखने के कारण स्कूल से निकाल दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने छात्र को स्कूल से निकाल देने के आदेश को बचकाना और ग़ैर ज़रुरी करार दिया है.

इस छात्र का मामला कुछ महीनों पूर्व उस वक्त सुर्खियों में आया था जब सिरोंज में स्थित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान निर्मला कान्वेंट हायर सेकेण्डरी स्कूल के दसवीं के छात्र सलीम की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि धर्मनिरपेक्षता का विस्तार ज्यादा नहीं किया जा सकता और देश का तालेबानीकरण की अनुमति नहीं दी जा सकती है.

सब्ज़ी विक्रेता के पुत्र सलीम ने धर्म के नाम पर दाढ़ी रखी थी जबकि स्कूल का नियम है कि छात्रों को बगैर दाढ़ी के रहना है.

इस मामले पर सलीम के वकील ने दलील दी थी कि दाढ़ी रखना इस्लाम का अभिन्न अंग है.

सुप्रीम कोर्ट की दूसरी बेंच के सामने ये मसला उस वक्त आया जब जस्टिस रवींद्रन और काटजू की पहली बेंच ने छात्र की याचिका ख़ारिज कर दी थी. उन्होंने पुनर्विचार खाचिका को सुनने से इंकार कर दिया था और कहा था कि इसे दूसरी बेंच में पेश किया जाए.

उस वक्त जास्टिस काटजू की बात पर काफी बवाल मचा था जब उन्होंने कहा था कि देश के तालेबानीकरण की इजाज़त नही दी जा सकती है.

सलीम के वकील अब्दुल करीम अंसारी के ज़रिए लगी पुनर्विचार खाचिका में जस्टिस काटजू ने अपने बयान के लिये माफी मांगी थी और कहा था कि मामले की फिर से सुनवाई की जानी चाहिए.

इस मसले पर स्कूल ने फिलहाल चुप्पी साध ली है. व

वहीं मध्यप्रदेश कैथलिक चर्च के प्रवक्ता फादर आनंद का कहना है, “हमें अभी फैसले की कापी नही मिली है. सुप्रीम कोर्ट का जो भी आदेश होगा उसका पालन किया जायेगा.”

वही छात्र सलीम का कहना है कि, “ सुप्रीम कोर्ट ने जो टिप्पणी की थी उससे न सिर्फ मुझे बल्कि पूरे मुस्लिम समाज को आघात लगा था.हम चाहते थे कि इस पूरे मसले पर सुप्रीम कोर्ट फिर से विचार करे.”

सलीम का कहना है कि सविंधान के अनुच्छेद 25 में हर नागरिक को अपने धर्म के पालन का अधिकार है.

सलीम सोमवार से स्कूल में अपनी पढ़ाई शुरु करने जा रहा है. उसका कहना है कि इस मसले के चलते उसका एक साल ख़राब हो गया वरना वो अभी 11वीं में होता. बहरहाल अब वो इस फैसले से काफी ख़ुश है.

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