गिलगित पर भारत-पाक बयानबाज़ी

बल्तिस्तान
Image caption गिलगित-बल्तिस्तान को अब तक पाकिस्तान के नॉर्दर्न एरियास के नाम से जाता था

पाकिस्तान प्रशासित गिलगित-बल्तिस्तान को स्वशासन का अधिकार देने के पाकिस्तान सरकार के हाल के फ़ैसले पर भारत और पाकिस्तान के बीच तीखी बयानबाज़ी हुई है.

हाल में पाकिस्तान सरकार के द्वारा इस क्षेत्र के बारे में स्वशासन के फ़ैसले पर शुक्रवार को भारत के विदेश मंत्रालय ने आपत्ति जताई और दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रिफ़त मसूद को विदेश मंत्रालय बुलाकर कूटनीतिक विरोध पत्र सौंपा.

दूसरी ओर पाकिस्तान ने भारत के विरोध को ख़ारिज करते हुए इस्लामाबाद में भारत के उच्चायुक्त राहुल कुलश्रेष्ठ को पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के महानिदेशक (दक्षिण एशिया) के दफ़्तर बुलाया जहाँ उन्हें इस बारे में अवगत कराया गया.

भारत के आरोप

भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा - "भारत सरकार ने कूटनीतिक ज़रिए से पाकिस्तान के तथाकथित गिलगित-बल्तिस्तान एम्पावरमेंट एंड सेल्फ़ गवर्नेंस ऑर्डर - 2009 पर विरोध जताया है."

भारत के बयान में आरोप लगाया गया है कि 'पाकिस्तान ने पिछले छह दशक से उन लोगों को मूलभूत लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रखा है जो जम्मू-कश्मीर के उन इलाक़ो में रहते हैं जिनपर पाकिस्तान का अवैध कब्ज़ा है.'

ग़ौरतलब है कि भारत अनेक बार इस तरह के आरोप लगाता आया है जिन्हें पाकिस्तान ख़ारिज करता रहा है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है, "वर्ष 1947 में भारत में शामिल होने की सहमति जताने के कारण पूरा जम्मू-कश्मीर राज्य भारत का अभिन्न अंग है. पाकिस्तान का तथाकथित गिलगित-बल्तिस्तान एम्पावरमेंट एंड सेल्फ़ गवर्नेंस आदेश - 2009 एक और कार्रवाई है जो पाकिस्तान के अवैध कब्ज़े को छिपाने की कोशिश है."

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