परंपरा विरोधी जोड़ों को 'सुरक्षित घर'

खाप पंचायत
Image caption हरियाणा में खाप पंचायत का काफ़ी असर है

हारियाणा में जो लड़के-लड़कियाँ समाज की बनाई रिवायतों के ख़िलाफ़ शादी करने का साहस करते हैं उनकी सुरक्षा के लिए राज्य सरकार ने 'सेफ़ होम' यानी सुरक्षित घर की योजना प्रयोग के तौर पर रोहतक ज़िले से शुरू करने का फ़ैसला किया है.

योजना की शुरुआत इसी महीने से होगी. हरियाणा पुलिस में क़ानून व्यवस्था की ज़िम्मदारी संभालने वाले पुलिस महानिदेशक वीएन राय पर इस योजना को लागू करने की ज़िम्मेदारी है.

योजना के बारे में वीएन राय कहते हैं, "जो जवान बच्चे समाज के नियम तोड़ कर शादी करते हैं, उनकी सुरक्षा पुलिस के लिए एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. ऐसे जोड़े अदालतों और थानों में जाकर सुरक्षा मांग रहे हैं, इनकी तादाद सैंकड़ों में है. इन सबको उनके घरों या फिर जहाँ वे छिप कर रह रहे हैं वंहा सुरक्षा उपलब्ध कराना संभव नहीं है."

वो आगे कहते हैं, "हमारी कोशिश है कि ऐसे केंद्र स्थापित किए जाएं, जहां पुलिस बल के साथ उनको सुरक्षित रखा जा सके. हर ज़िले में इस तरह के केंद्र बनाने की योजना है."

इज़्ज़त के नाम पर क़त्ल

हरियाणा सरकार ने माना कि राज्य में इज़्ज़त के नाम पर जो क़त्ल हो रहे हैं, उसे अब और नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. सरकार ने ये भी स्वीकार किया है कि इज़्ज़त के नाम पर क़त्ल किए जाने वाले जवान लड़के-लड़कियों की तादाद उस तादाद से कहीं ज़्यादा है, जो रिपोर्ट होती है.

ग़ौरतलब है कि पिछले महीने इस विषय पर बीबीसी हिंदी ने अपनी विशेष प्रस्तुति में खाप पंचायत का क़हर झेल रहे और परंपरा के विरुद्ध शादी करने वाले जोड़े रवींद्र और शिल्पा से बात की थी. हरियाणा सरकार की इस नई योजना की घोषणा के बाद फिर हमने रवींद्र और और शिल्पा से बात की.

वो कहते हैं, "आख़िर कोई कब तक इन केंद्रों में रह सकता है, माना ये सुरक्षित हैं, पर सवाल ये हैं कि क्या ये एक सामन्य ज़िदंगी होगी, हमें कामकाज़ भी तो करना है, मुझे तो नहीं लगता कि इस योजना से कोई फ़ायदा होने वाला है."

वीएन राय भी उनकी बात से सहमत हैं कि इन सुरक्षित घरों में ये जोड़े ताउम्र नहीं रह सकते.

लेकिन उनका कहना है पुलिस का अनुभव है कि जब कोई जोड़ा खाप पंचायतों का नियम तोड़ता है, तो शुरुआत में तनाव बहुत ज़्यादा होता है और प्रशासन और समाज को उन वर्गों को प्रतिक्रिया का समय नहीं मिल पाता जो इस तरह के मामलों में बीच बचाव कर सकते हैं.

वीएन राय कहते हैं, "हम ये नहीं कह रहे हैं कि ये जोड़े पूरी ज़िदंगी इन घरों में बिताएं, इस योजना का मक़सद है कि इन जोड़ों को तब तक रखा जाए जब तक कि शुरुआती तनाव कम न हो जाए. हमारा अनुभव है कि ज़्यादातर मामलों में अगर कुछ समय मिल जाए तो बीच बचाव हो जाता है."

लेकिन शिल्पा पुलिस की नियत पर ही सवाल उठाती है. वो कहती हैं कि ज़्यादतर मामले में पुलिस खाप से मिल जाती है या फिर उनके दबाव में काम करती है.

पुलिस की भूमिका पर सवाल

खाप नियमो के विरुद्ध शादी करने के बाद रविंद्र और शिल्पा को रिश्ते तोड़े के लिए कहा गया

जब पुलिस सुरक्षा में लोगों को मारा जा सकता है तो फिर ये कैसे माना जाए कि पुलिस के इन सुरक्षित घरों में हमारे जैसे लोग सुरक्षित रहेगें. पिछले दिनों ही जींद ज़िले में 15 पुलिस वालों की मौजूदगी में ही एक लड़के को मार दिया गया.

वीएन राय भी मानते हैं की पुलिस की भूमिका इन मामलों में कई बार संदिग्ध हो सकती है, पर वो कहते हैं की पुलिस की मानसिकता बदलने की कोशिश की जा रही है, उसे और संवेदनशील बनाया जा रहा है.

उनका कहना है, "हरियाणा पुलिस के ज़्यादातर लोग उसी समाज से आते हैं और वो खाप, गोत्र आदि के प्रभाव में होते हैं, पर अब हमने अपनी ट्रेनिंग एकेडमी में उन्हें इन मुद्दों पर संवेदनशील बनाने की कोशीश शुरु की है."

लेकिन रवींद्र पुलिस की इस दलील से बिल्कुल प्रभावित नहीं हैं. उनकी नज़र में इज़्ज़त के नाम पर होने वाली हत्याओं को रोकने का एक ही रास्ता है और वो है खाप पंचायतों पर प्रतिबंध और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई.

रवींद्र कहते हैं, "इन पंचायतों पर रोक लगनी चाहिए, और अगर ऐसा हो जाए तो फिर कोई परेशानी नहीं होगी."

लेकिन शिल्पा कहती हैं, "खाप पंचायतों पर प्रतिबंध नहीं लग सकता, क्योंकि ये वोट बैंक का साधारण सा गणित है."

शिल्पा का आकलन बिल्कुल ग़लत नहीं है, खाप पंचायतों पर प्रतिबंध के सवाल पर वीएन राय कहते हैं ऐसा ना संभव है और ना उसकी आवश्यकता है.

उनके अनुसार इन पंचायतों का गांव के छोटे मोटे झगड़े निपटाने में अहम भूमिका रही है और एक पुलिस अफ़सर के तौर पर इन खापों की इस भूमिका का वो स्वागत करते हैं.

कुल मिलाकर हरियाणा में खाप पंचायतों के तुग़लकी फ़रमानों के क़हर से बचाने के लिए प्रशासन ने कई क़दम उठाएं हैं, ये इस बात का प्रमाण है कि उसने शायद पहली बार ये माना है की सम्मान के नाम पर हत्याएं एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन उसकी ये कोशिश सराहनीय होते हुए भी अधूरी है.

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