खंडन के बावजूद चीन का मसला 'छाया'

भारत-चीन के झंडे
Image caption भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर विवाद रहे हैं

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों, भारतीय विदेश मंत्रालय और चीन की सरकार के खंडन के बावजूद भारतीय सीमा के भीतर चीन के कथित हमलों की ख़बरें भारतीय मीडिया के एक वर्ग में छाई हुई हैं.

पिछले कुछ दिनों से भारतीय मीडिया में लगातार खबरें आ रही हैं कि चीनी सेना भारत के लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में घुसी है और वहाँ कुछ न कुछ कार्रवाई हुई है.

कुछ मीडिया संस्थानों ने सबूत के तौर पर भारत की घोषित सीमा के भीतर लाल रंग से पेंट किए गए पत्थर, जिन पर चीनी गणराज्य लिखा था, पेश किए हैं. कहा यह भी गया कि चीनी जहाजों ने भारतीय सीमा में घुसकर खाने के डब्बे गिराए और भारतीय सीमा बलों पर फ़ायरिंग भी की जिसमें भारतीय-तिब्बत सीमा सुरक्षा बल या आईटीबीपी के दो जवान घायल हो गए.

भारत, चीन की ओर से खंडन

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस आईटीबीपी ने उत्तरी सिक्किम के केरंग क्षेत्र में कथित घटना की ख़बरों को ग़लत और आधारहीन बताया है.

भारतीय वायु सेना ने भी भारतीय सीमा के उल्लंघन की बात से इनकार किया है.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी आईटीबीपी से संबंधित कथित घटना का खंडन किया है और कहा है कि तथ्यों के आधार पर ग़लत है.

इतना ही नहीं चीन के विदेश मंत्रालय ने भी इन ख़बरों को ग़लत बताया है और कहा है कि वह नहीं जानते कि इस तरह की ख़बरों का क्या उद्देश्य है?

ग़ौरतलब है कि इस बीच गुरुवार को वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों की एक बैठक बुलाई गई है.

ख़बरें हैं कि भारतीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर की गृह, सुरक्षा और विदेश सचिवों के साथ गुरुवार को बैठक होने जा रही है.

उधर रक्षा विशेषज्ञ मारूफ़ रज़ा कहते हैं, "जब भी चीन का मुद्दा उठता है तो भारत सरकार इसी तरह ख़ामोश हो जाती है और यह मामला साठ के दशक से जारी है जब भारत हिंदी-चीनी भाई-भाई का नारा लगता रहा और चीन ने भारत पर हमला कर दिया था."

वो सवाल उठाते हैं कि आख़िर चीन भारत की तमाम कोशिशों के बावजूद सीमा निर्धारण के लिए क्यों तैयार नहीं है?

तनाव क्यों बढ़ जाता है?

रक्षा मामलों के जानकार भारतीय सेना के पूर्व कर्नल अजय शुक्ल कहते हैं कि '1993 से 1996 के बीच दोनों देशों के बीच हुई बातचीत के बाद सीमा पर तनाव में कमी आई है लेकिन तनाव तब बढ़ जाता है जब दोनों में से किसी एक देश की ओर से कुछ ऐसी गतिविधियाँ होती हैं जिससे दूसरा ख़तरा महसूस करता है.'

वो कहते हैं, "भारत ने इस साल के शुरू में सेना की दो डिविज़नों को अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर तैनात करने की योजना बनाई थी. शुक्ल के अनुसार भारत को ऐसा इसीलिए करना पड़ा क्योंकि चीन ने उस इलाक़े के अपने क्षेत्र में आधारभूत ढांचे को बहुत मज़बूत कर लिया है और अपनी गतिविधियाँ भी बढ़ा दी हैं."

भारत और चीन के बीच की सीमा के बारे में दोनों देश अलग-अलग रुख़ रखते हैं, इसीलिए इस क्षेत्र में एक देश की सेना की आवाजाही को दूसरा देश अपनी सीमा का उल्लंघन मान लेता है.

इतना ही नहीं चीन भारत के अरुणाचल प्रदेश को अपने मानचित्रों में चीन का हिस्सा दिखाता रहा है जबकि भारत इससे इनकार करता रहा है.

संबंधित समाचार

संबंधित इंटरनेट लिंक

बीबीसी बाहरी इंटरनेट साइट की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है