महिला आरक्षण पर क़ानूनी सवाल

एक भारतीय ग्रामीण महिला
Image caption महिलाओं के नगरपालिकाओं में आरक्षण की सीमा पर रोक लगाई गई है

राजस्थान में नगर पालिका संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण में अवरोध पैदा हो गया लगता है.

राजस्थान हाई कोर्ट ने उस क़ानूनी संशोधन पर रोक लगा दी है जिसमें सरकार ने हाल में महिलाओं के लिए पालिका संस्थाओं में आरक्षण की ये व्यवस्था की थी.

हाई कोर्ट ने गुरुवार को ये रोक तब लगाई जब सीकर के मोहम्मद कलीम ने इसे चुनौती दी और कहा कि नई व्यवस्था से पालिका संस्थाओं में आरक्षण की सीमा बढ़ कर 50 से बहुत ज़्यादा हो गई है.

ऐसा करना सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी मामले में दिए गए निर्णय का उल्लंघन होगा.

हाई कोर्ट ने क़ानून में किए गए इस संशोधन पर रोक लगा दी और सरकार से जवाब तलब किया है.

राज्य सरकार ने हाल ही में 1959 के नगर पालिका कानून में बदलाव कर महिलाओं के लिए इन संस्थाओ में 50 प्रतिशत की व्यवस्था कर दी थी जबकि पहले महज 33 प्रतिशत आरक्षण था.

याचिकाकर्ता के वकील अनूप ढढ ने हाई कोर्ट में कहा कि नए प्रावधानों से आरक्षण बढ़ कर कोई 90 फ़ीसदी तक जा पहुँचा है. इससे सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवहेलना हुई है.

अनूप ढढ ने बीबीसी को बताया कि नए प्रावधानों से आरक्षण की सीमा बहुत ज़्यादा बढ़ गई है क्योंकि सरकार ने इसके साथ युवा वर्ग के लिए भी 20 फ़ीसदी का प्रस्ताव किया है.

अनूप ढढ का कहना था कि ये सारे प्रावधान जोड़ें तो ये 90 फ़ीसदी से भी ज़्यादा हो जाते हैं.

राज्य में कोई दो माह बाद पालिका संस्थाओं में चुनाव होने वाले है.

आरक्षण के नए प्रावधानों के बाद इन चुनावों में उम्मीदवारी का मन बना चुकी महिलाओं को अब नए सिरे से सोचना होगा क्योंकि 50 फ़ीसदी आरक्षण पर क़ानूनी सवाल खड़ा हो गया है.

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