थरुर के बयान पर बवाल जारी

शशि थरूर
Image caption शशि थरूर दो हफ़्ते पहले तक एक पाँच सितारा होटल में कमरा लेकर रह रहे थे

यूपीए सरकार में विदेश राज्य मंत्री और केरल के कांग्रेस सांसद शशि थरुर ने खर्च में कटौती के मामले में खेद भले ही व्यक्त कर दिया हो लेकिन कांग्रेस के भीतर इस पर बवाल जारी है.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लगातार दूसरे दिन उन पर हमला किया है और कहा है कि इससे पहले कि प्रधानमंत्री और पार्टी हाईकमान उनसे इस्तीफ़ा देने को कहें, उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

हालांकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस विवाद को ज़्यादा तूल देने से इनकार कर दिया है और अपनी इफ़्तार पार्टी में सिर्फ़ यह कहकर बात टाल दी कि वह एक मज़ाक था.

लेकिन कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा है कि कांग्रेस ने शशि थरुर के बयान की निंदा करती है. उन्होंने कहा कि उपयुक्त समय पर पार्टी की ओर से समुचित क़दम उठाया जाएगा.

उल्लेखनीय है कि सामुदायिक नेटवर्क ट्विटर में शशि थरुर ने एक सवाल के जवाब में हवाई जहाज़ के रियायती दर्जे यानी इकॉनॉमी क्लास को मशेवी दर्जा कह दिया था और कहा था कि वे भी अब इसी दर्जे में सफ़र करेंगे.

उन्होंने कहा था कि वे अपनी पार्टी के बड़े नेताओं (जिसे उन्होंने होली काउ कहा था) के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए ऐसा करेंगे.

चूंकि सोनिया गांधी हवाई जहाज़ के रियायती दर्जे में यात्रा कर चुकी हैं और उनके बेटे और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ट्रेन के चेयरकार में यात्रा कर चुके हैं, पार्टी के लोग इसे सीधे उन पर टिप्पणी मान रहे हैं. हालांकि वे अपनी प्रतिक्रिया में आम लोगों की तुलना मवेशियों से करने पर आपत्ति जता रहे हैं.

आर्थिक मंदी के दौर में फ़िज़ूलखर्ची से बचने के लिए कांग्रेस ने अपने नेताओं और मंत्रियों से मितव्ययिता बरतने की सलाह दी थी.

इसी की वजह से शशि थरुर और विदेश मंत्री एसएम कृष्णा को पाँच सितारा होटलों में अपने कमरे छोड़ने पड़े थे.

इस्तीफ़े की सलाह

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को भी विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर के बयान पर ऐतराज़ जताया था.

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि शशि थरुर ने ऐसी टिप्पणी करके ग़लत किया है.

उन्होंने जनता से माफ़ी मांगने की सलाह देते हुए कहा था कि उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

जब एक पत्रकार ने कहा कि थरूर ने हल्के-फ़ुल्के ढंग से ऐसी टिप्पणी की होगी क्योंकि सामुदायिक नेटवर्क की ज़ुबान ही ऐसी होती है, तो गहलोत ने जवाब में कहा था, "उन्हें अपने पद की गरिमा का अहसास होना चाहिए था."

शुक्रवार को उन्होंने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा है कि इससे पहले कि प्रधानमंत्री या पार्टी हाईकमान उनसे इस्तीफ़ा मांगे, उन्हें ख़ुद पद छोड़ देना चाहिए.

इससे पहले पार्टी की एक और प्रवक्ता जयंती नटराजन भी शशि थरूर के इस बयान को ख़ारिज कर चुकी हैं.