आडवाणी फिर फँसे विवाद में

लालकृष्ण आडवाणी
Image caption संकेत हैं कि आडवाणी जल्द ही लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ देंगे

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी एक बार फिर विवाद में फँस गए हैं.

विवाद यह है कि उन्होंने पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह को पार्टी के से निकाले जाने के फ़ैसले के बारे में कहा है कि वे नहीं चाहते थे कि जसवंत सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया जाए.

लेकिन भाजपा ने इसे सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा है कि जसवंत सिंह को पार्टी से निकालने का फ़ैसला सर्वसम्मति से किया गया था.

पहले जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष बताने के बाद विवाद में पड़ चुके आडवाणी, दूसरी बार तब विवाद में फँसे जब उन्होंने अपनी किताब में लिखा कि कंधार में चरमपंथियों को छोड़ने की बात उनकी जानकारी में नहीं थी.

जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष बताए जाने के बाद उन्हें पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा था.

विवाद

मोहम्मद अली जिन्ना पर जसवंत सिंह की किताब प्रकाशित होने के बाद भाजपा ने 19 अगस्त को शिमला में चिंतन बैठक शुरु होने के पहले जसवंत सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया था.

निष्कासन की यह सूचना जसवंत सिंह को शिमला पहुँचने के बाद भी फ़ोन पर दी गई थी. इस फ़ैसले के बाद जसवंत सिंह ने कहा था कि तीस साल पार्टी में काम करने के बाद उन्हें निष्कासित किए जाने की सूचना देने की औपचारिकता भी सही ढंग से नहीं निभाई गई.

इसके बाद की बयानबाज़ी में जसवंत सिंह ने लालकृष्ण आडवाणी पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा था कि कंधार में अपहृत विमान के यात्रियों को छुड़ाने के बदले चरमपंथियों को छोड़ने का फ़ैसला मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति की बैठक में लिया गया था और आडवाणी उसका हिस्सा थे.

उसके बाद लोकसभा में नोटों की गड्डियाँ लहराए जाने वाले मामले पर भी जसवंत सिंह ने आडवाणी पर आरोप लगाए थे.

लेकिन लालकृष्ण आडवाणी ने 19 अगस्त से अब तक चुप्पी साध रखी थी. उनके सलाहकार रह चुके, और अब भाजपा छोड़ चुके सुधीन्द्र कुलकर्णी ने ज़रुर यह संकेत दिए थे कि जसवंत सिंह के निष्कासन में आडवाणी की सहमति नहीं रही होगी.

लेकिन शनिवार को यह ख़बर आने के बाद पार्टी ने आडवाणी के बयान को सिरे से ख़ारिज कर दिया.

Image caption किताब में नेहरु के साथ-साथ वल्लभ भाई पटेल को भी विभाजन के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाना भाजपा को नागवार गुज़रा

पार्टी के प्रवक्ता अनंत कुमार ने कहा, "निष्कासन का निर्णय पार्टी की संसदीय समिति ने लिया था और समिति का सभी निर्णय सर्वसम्मति से होता है."

यह पूछे जाने पर कि क्या जसवंत सिंह को निकाले जाने के फ़ैसले में लालकृष्ण आडवाणी की सहमति थी, उन्होंने कहा, "सब सहमत थे."

पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से जब मीडिया ने आडवाणी के इस बयान पर प्रतिक्रिया जाननी चाही तो वे अर्थपूर्ण ढंग से मुस्कुराते हुए बिना कुछ कहे चल दिए.

समझा जाता है कि जसवंत सिंह को निकाले जाने के बाद संघ के हस्तक्षेप से पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन किया जाना है. संकेत हैं कि लालकृष्ण आडवाणी जल्दी ही लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफ़ा दे देंगे और राजनाथ सिंह अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद फिर से इस पद पर नहीं चुने जाएँगे.

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