'मोदी नहीं, रिकॉर्ड पेश किए जाएं'

नरेंद्र मोदी
Image caption मुख्यमंत्री मोदी को पूछताछ के लिए बुलाने के आग्रह को आयोग ने ठुकरा दिया

गुजरात दंगों की जाँच करनेवाले नानावती आयोग ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कुछ अधिकारियों से दंगों के दौरान टेलिफ़ोन पर हुई बातचीत का ब्यौरा देने के लिए कहा है.

हालाँकि आयोग ने मुख्यमंत्री को पूछताछ के लिए बुलाने की माँग को अस्वीकार कर दिया.

आयोग ने दंगा पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करनेवाले एक ग़ैर सरकारी संगठन जनसंघर्ष मंच की अपील पर सुनवाई करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए.

नानावती आयोग ने गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय के तीन अधिकारियों संजय भावसार, तन्मय मेहता और ओमप्रकाश को आदेश दिया है कि वे दंगों के दौरान टेलीफ़ोन पर हुई कुछ बातचीत का ब्यौरा प्रस्तुत करें.

जनसंघर्ष मंच ने आरोप लगाया है कि दंगों के दौरान गुजरात का मुख्यमंत्री कार्यालय विश्व हिंदू परिषद के कुछ ऐसे नेताओं के साथ लगातार संपर्क में था जिनपर दंगों में शामिल होने का संदेह है.

संस्था ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पूछताछ के लिए बुलाए जाने की माँग की थी लेकिन आयोग ने उनकी इस माँग को अस्वीकार कर दिया.

मगर जनसंघर्ष मंच के वकील मुकुल सिन्हा ने कहा है कि मुख्यमंत्री मोदी को पूछताछ की अनुमति नहीं देने के आयोग के फ़ैसले को उच्च न्यायालय मे चुनौती दी जाएगी.

27 फ़रवरी 2002 को गुजरात में गोधरा स्टेशन पर एक रेलगाड़ी की चार बोगियों में आग लगने से 58 लोग जलकर मारे गए थे. मारे गए अधिकतर यात्री हिंदू श्रद्धालु थे जो अयोध्या से लौट रहे थे.

गोधरा कांड के बाद पूरे गुजरात में दंगे भड़क उठे और इससे 1000 से अधिक लोग मारे गए थे.

गुजरात सरकार ने दंगों की जाँच के लिए पहले शाह आयोग गठित किया था जिसके अध्यक्ष गुजरात उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के जी शाह थे.

बाद में कुछ आलोचनाओं के कारण आयोग का पुनर्गठन किया गया और आयोग का प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जी टी नानावती को बना दिया गया.

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