एक लीक पर भारत-पाकिस्तान वार्ता...?

भारत-पाक
Image caption मुंबई हमलों के बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास का माहौल है.

भारत और पाकिस्तान के बीच अगले हफ़्ते न्यूयॉर्क में अधिकारियों और विदेश मंत्री स्तर की वार्ताएं होने वाली हैं. हालांकि वार्ताओं के इस दौर से उम्मीदें कम हैं लेकिन बातचीत के लिए ज़मीन तैयार की जा रही है.

पिछले कई महीनों से भारत 26 नवंबर को मुंबई पर हुए हमले में कथित भूमिका के लिए जमात उद दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग करता रहा है. जमात उद दावा को प्रतिबंधित लश्करे तैबा का नया रुप माना जाता है.

26 नवंबर की घटना को जल्दी ही एक साल होने वाले हैं. इसके मद्देनज़र पाकिस्तानी अधिकारियों ने मुंबई हमलों के मामले में जिन सात लोगों को गिरफ़्तार किया है उनके ख़िलाफ़ जांच और कार्रवाई की स्थिति को लेकर सवाल भी तेज़ हो जाने वाले हैं.

16 जुलाई को शर्म अल शेख में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री युसुफ़ रज़ा गिलानी और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मुलाक़ात से पहले पाकिस्तान ने घोषणा की थी कि हाफ़िज़ सईद को हिरासत से रिहा करने के हाई कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा रही है.

अब फिर पाकिस्तान ने शुक्रवार को घोषणा की है कि सईद के ख़िलाफ़ आतंकवाद निरोधी क़ानून के तहत दो मामले दर्ज किए गए हैं. सईद पर आरोप हैं कि उन्होंने अगस्त के महीने में जिहाद का महिमामंडन करते हुए भाषण दिए. यह पहली बार है जब सईद के ख़िलाफ़ इस क़ानून का इस्तेमाल किया गया है.

भारत में कुछ प्रेक्षक भारत के साथ वार्ताओं से पहले पाकिस्तान की कार्रवाई में एक तरह का पैटर्न देखते है, एक ढर्रा पाते हैं. वो कहते हैं कि वार्ताओं को एक औपचारिक जामा पहनाने यानी समग्र वार्ता प्रक्रिया को वापस पटरी पर लाने की कोशिशों के तहत पाकिस्तान खुद को ज़िम्मेदार दिखाने के उद्देश्य से ये घोषणाएं करता है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के फिर से सत्ता संभालने के बाद से पाकिस्तान के साथ बैठकों का दो दौर हो चुका है लेकिन इसके बावजूद भारत औपचारिक वार्ताओं को शुरु करने से परहेज़ करता रहा है. औपचारिक या समग्र वार्ता प्रक्रिया में जम्मू कश्मीर और आतंकवाद समेत आठ मुद्दे शामिल हैं.

अब पाकिस्तान मुंबई हमलों के मामले में गिरफ़्तार सात अभियुक्तों और हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ क्या करता है, इस पर सबकी नज़र है. अगर उनके ख़िलाफ़ जल्दी कार्रवाई हो और उन्हें सज़ा मिले तो भारत की जनता में काफ़ी हद तक ये विश्वास जगेगा कि पाकिस्तान आतंकवाद से निपटने के प्रति गंभीर है.

पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक ने शनिवार को कहा भी है कि हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ भारत ने जो लीड्स दी है उसको वो ख़ारिज़ नहीं करते हैं.

उनका कहना था, ‘‘मैं यह घोषणा करना चाहूंगा कि हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ जांच चल रही है... वो जांच के दायरे में हैं.’’

मलिक का यह बयान जमात उद दावा के प्रमुख के ख़िलाफ़ पाकिस्तान के रुख में एक बदलाव माना जा सकता है.

मलिक ने हाल में भारत के उच्चायुक्त शरत सबरवाल से भी मुलाक़ात की है और उन्हें एक दस्तावेज़ सौंपा है जिसके अनुसार मुंबई पर हमला करने वालों ने जिन नौकाओं का इस्तेमाल किया था उसमें एक और नौका जब्त की गई है.मलिक ने भारतीय अदालतों में दिए गए बयानों पर भारत से और जानकारी भी मांगी है.

उधर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने हाल में ही एक टेलीविज़न चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा है कि भारतीय प्रधानमंत्री ने शर्म अल शेख में जो रुख दिखाया था उसमें कोई बदलाव नहीं आया है. हालांकि शर्म अल शेख में भारतीय रुख की आलोचना भी हुई थी.

नारायणन का कहना था, ‘‘मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री ने शर्म अल शेख में जो कहा था वही हमारी नीति है कि वार्ताओं से ही आगे बढ़ा जा सकता है. ’’

अगले सात दिनों में जहां न्यूयॉर्क में भारत और पाकिस्तान के अधिकारी संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के लिए जमा होंगे वहीं दोनों देश दिल्ली और इस्लामाबाद से आ रहे संकेतों पर भी नज़र रखेंगे.

भारत और पाकिस्तान के लिए, जैसा कि हमेशा से होता आया है, संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक से अधिक महत्वपूर्ण इससे हटकर होने वाली बैठकें होंगी.

निकट भविष्य में दोनों देशों के विदेश सचिवों यानी निरुपमा राव और सलमान बशीर तथा विदेश मंत्री एसएम कृष्णा और शाह महमूद कुरैशी के बीच वार्ताओं में मुख्य मुद्दा आतंकवाद ही रहने वाला है.

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