बड़ी संख्या में नरकंकाल मिले

नरकंकाल (फ़ाइल फोटो)
Image caption पुरातत्व अधिकारियों को भी बुलाया गया है

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी ज़िले के बथेरा गांव के पास बड़ी संख्या में नर कंकाल और हड्डियां पाई गई हैं.

नेपाल की सीमा के नज़दीक बथेरा गांव में नरेगा के तहत एक दलित किसान की ज़मीन का समतलीकरण किया जा रहा था. खुदाई के दौरान वहाँ बड़ी संख्या में मानव अवशेष पाए गए.

गाँव वालों के मुताबिक़ 14, 15 और 17 सितंबर को इस एकड़ ज़मीन की खुदाई चल रही थी. खुदाई के दौरान इस ज़मीन से हड्डियाँ, खोपड़ियाँ और नरकंकाल मिले.

पहले तो मज़दूरों ने पास के तलाब में कुछ हड्डियों को फेंक दिया, लेकिन बाद में इसकी सूचना तहसीलदार तक पहुँचाई गई. तहसीलदार ने इस बारे में ज़िलाधिकारी समीर वर्मा को सूचित किया.

लखीमपुर खीरी के ज़िलाधीश समीर वर्मा ने बीबीसी को बताया कि इसकी ख़बर मिलते ही क्षेत्र के उप ज़िलाधीश और पुलिस अधिकारियों ने घटना स्थल का मुआयना किया.

समीर वर्मा ने कहा, "प्रथम दृष्ट्या बथेरा गांव के पास पाए गए नर कंकाल और हड्डियों को देख कर लगता है कि ये बहुत पुराने हैं लेकिन उनके पास इनकी उम्र का पता लगाने के लिए कार्बन डेटिंग की व्यवस्था नहीं है."

मुआयना

उन्होंने कहा है कि लखनऊ में भारतीय पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित कर दिया गया और एक टीम एक दो दिन में बथेरा पहुंच कर घटना स्थल का मुआयना करेगी.

लखीमपुर खीरी के ज़िलाधीश समीर वर्मा ने बताया, "ऐसी मान्यताएं हैं कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां समय बिताया था और हो सकता है इस स्थल में पुरातत्व विभाग को कुछ प्राचीन अवशेष मिल जाएं, इसलिए पुरातत्व विभाग को सूचित किया गया है."

नरकंकाल मिलने पर आसपास के लोगों में कई तरह की किंवदन्तियाँ ज़ोर पकड़ रही हैं. कुछ लोग ये कह रहे हैं कि इसी इलाक़े में विराट की राजधानी हुआ करती थी, तो कुछ का कहना है कि बेग़म हजरत महल और अंग्रेज़ों के बीच यहीं लड़ाई हुई थी.

समीर वर्मा ने बीबीसी को बताया है कि फ़िलहाल जहाँ नरकंकाल पाए गए थे वहाँ उन्हें मिट्टी से ढँक दिया गया है और विशेषज्ञों के आने का इंतज़ार किया जा रहा है.

लेकिन लखनऊ ज़ोन के पुरातत्त्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी आईडी द्विवेदी ने बीबीसी को बताया कि बुधवार तक विभाग की एक टीम वहाँ जाएगी.

हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि हड्डियों से कोई भी निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है. इसके लिए मानवविज्ञानियों की मदद ली जानी चाहिए.

दूसरी ओर मोहम्मदी के सरकारी अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर बलबीर सिंह का कहना है कि हड्डियों को देखकर यही अंदाज़ा लगता है कि ये क़रीब 150 साल पुरानी हो सकती हैं.

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