नलिनी ने तोड़ा अनशन

नलिनी और अन्य

नलिनी राजीव गांधी हत्या के मामले में 18 साल की सज़ा जेल में काट चुकी हैं.

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा भुगत रही नलिनी श्रीहरन ने वेल्लोर जेल में अपना अनशन बुधवार सुबह ख़त्म कर दिया.

वे रिहाई की मांग को लेकर जेल में ही सोमवार से अनिश्चितकालीन अनशन पर थीं.

नलिनी का कहना था कि उनकी मांग पर विचार करने के लिए एक सलाहकार बोर्ड का गठन जल्द से जल्द किया जाए.

नलिनी ने अनशन जेल अधिकारियों के इस आश्वासन के बाद ख़त्म किया कि उनकी याचिका पर क़ानून के मुताबिक़ विचार किया जाएगा.

जेल के अधिकारियों ने समाचार एजेंसियों को बताया कि याचिका पर क़ानून के मुताबिक़ विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद नलिनी श्रीहरन ने बुधवार सुबह अपना अनशन तोड़ दिया.

नलिनी के पति मुरुगुन भी इसी जेल में राजीव गांधी की हत्या के मामले में बंद हैं.

आश्वासन

इस महीने की 11 तारीख़ को मद्रास हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर नलिनी ने रिहाई की माँग की थी.वह पिछले 18 साल से वेल्लोर जेल में बंद हैं.

उनका कहना हैं कि अपराध दंड संहिता की धारा-433(ए) के तहत जेल से समय पूर्व रिहाई के लिए 14 साल की सज़ा काटना ज़रूरी होता है.ये समय को वह जून 2005 में ही पूरा कर चुकी हैं.

नलिनी ने अपनी याचिका में कहा है कि राजीव गांधी की विधवा सोनिया गांधी और उनकी बेटी प्रियंका ने भी उन्हें माफ़ कर दिया है. इसलिए उन्हें रिहा किया जाए.

नलिनी और मुरुगन को राजीव गांधी की हत्या के मामले में गिरफ़्तार किया गया था. अदालत ने उन्हें मुत्युदंड की सज़ा सुनाई थी. बाद में इसे आजीवन कारावास में बदल दिया गया.

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मई 1991 में तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में हत्या कर दी गई थी. इस हमले में आत्मघाती हमलावर के साथ 14 लोग मारे गए थे.

भारत इसके लिए श्रीलंका के तमिल विद्रोहियों की ज़िम्मेदार ठहराता रहा है. तमिल विद्रोहियों ने 2006 में राजीव गांधी की हत्या को बहुत बड़ी भूल बताया था.

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