युगरत्ना अपना नफ़ा नुक़सान जानती है

युगरत्ना
Image caption युगरत्ना न्यूयॉर्क से वापस आ गई है

वह शरीर से लखनऊ वापस आ गई है, पर उसका मन अभी भी न्यूयॉर्क और कोपेनहेगेन के बीच घूम रहा है.

मेरे हाथ में बीबीसी का माइक देखते ही वह अनायास ज़ोर से बोल पड़ी. 'अरे बीबीसी. बीबीसी पर तो मेरा भाषण लाइव ब्रॉडकास्ट हुआ था.' युगरत्ना और उसके पिता डाक्टर आलोक श्रीवास्तव हमें बड़े उत्साह से घर के अंदर ले गए.

जानकीपुरम में एक सामान्य मध्यमवर्गीय घर. डाक्टर आलोक वनस्पति शास्त्र पढ़ाते हैं. युगरत्ना की माँ डाक्टर रौशनी श्रीवास्तव ने जंतु विज्ञान में उच्च शिक्षा ली है, पर अब वह गृहिणी हैं. युगरत्ना के साथ न्यूयॉर्क वही गई थीं. युगरत्ना उनकी अकेली संतान है और घर में बस यही तीन प्राणी रहते हैं.

सफ़र में होने के कारण युगरत्ना संयुक्त राष्ट्र विशेष अधिवेशन में अपने भाषण का प्रस्रारण नहीं देख पाई थी और इंटरनेट में भी थोड़ा सा ही हिस्सा मिला था.

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इसलिए जैसे ही मेरे साथ गए एक टीवी रिपोर्टर अनंत जनाने ने उसे उसके भाषण की सीडी दी, सबसे पहले वह लैप टॉप में लगाकर अपना भाषण सुनने लगी.

बात चीत शुरू हुई तो वह जाने कितने देशों के नेताओं के नाम फ़टाफ़ट गिनाने लगी , जैसे उनके साथ रोज़ का उठना बैठना हो.

मुझे तो वह सब नाम भी याद नहीं, इसलिए मैंने पूछा क्या बराक ओबामा से हाथ मिलाया. मायूस युगरत्ना ने कहा वह छः चक्र सुरक्षा घेरे में थे. निकोलस सरकोज़ी को भी उसने बस दूर से ही देखा.

विशेष पोडियम

युगरत्ना इस बात से बहुत प्रभावित है कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने उसके लिए एक विशेष पोडियम फ़टाफ़ट बनवा दिया, क्योंकि उसका क़द छोटा है और रिहर्सल के दौरान उसका चेहरा छिप जा रहा था.

युगरत्ना को बहुत बहुत खुशी है कि जब उसने धरती का पर्यावरण बचाने के लिए भाषण दिया तो सौ से अधिक देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति वहाँ मौजूद थे.

उसने बताया कि उसे जंक फ़ूड और फ़िल्मी गाने बहुत पसंद हैं. खेलों में केवल बास्केट बाल और शतरंज. पर अब नेट सर्फिंग में ज़्यादा समय जाता है. तमाम देशों के लोगों से संपर्क जो बनाना पङता है.

युगरत्ना नौवीं क्लास की छात्रा है, उसे अपनी पढ़ाई पूरी करनी है. वह भौतिक विज्ञान यानी फ़िजिक्स, गणित और कंप्यूटर पढ़ना चाहती है. माँ बाप की तरह जीव विज्ञान में रूचि नहीं है.

लेकिन इस अचानक मिली शोहरत ने उसका जीवन बदल दिया है. स्वागत, अभिनन्दन, उदघाटन अगले कुछ दिनों के लिए वह इन सब में ही व्यस्त रहेगी.

माँ रौशनी की चिंता है कि बेटी सामान्य जीवन जिए. पिता डाक्टर आलोक मानते हैं कि भाषण में जो बातें कही हैं और गांधी जी का जो हवाला दिया है तो अपना जीवन वैसा ही ढालना पड़ेगा.

नो कमेंट्स

युगरत्ना एक एनजीओ तरुमित्र से जुडी है, जिसने उसे आगे बढाया है. उसने दस लाख पेड़ लगवाने का लक्ष्य रखा है. उसने लोगों से बिजली बचाने की अपील की. यह सब सुनते हुए मैंने बातों बातों में सहज ही उसके गृह जनपद सोनभद्र के भयावह पर्यावरण प्रदूषण पर चर्चा छेड़ दी, तो अचानक सारा माहौल ही बदल गया.

एक गहरी सांस लेते हुए उसने कहा, 'नो कमेंट्स.'

मैंने पूछा क्यों ?

युगरत्ना का कहना है कि सोनभद्र के लोगों को तो इतना प्रदूषण झेलना ही पड़ेगा, ''हक़ीक़त है कि वहां पॉवर प्लांट्स हैं. उत्तर प्रदेश की बिजली सप्लाई वहीं से पैदा होती है. आन्पा और ओबरा से बड़े बिजली घर हैं वहां. उस तरह का प्रदूषण तो वहां होगा ही. हम और बिजली कहाँ से बनायेंगे. हमारे उत्तर प्रदेश में और तो संसाधन हैं नही. इसलिए यह ठीक है.''

मैंने पूछा कि वहां से मायावती पत्थर बहुत खुदवा रही हैं तो फिर जवाब मिला, 'नो कमेंट्स'.

कहा आप इतना डिप्लोमैटिक क्यों हो रही हो तो युगरत्ना का जवाब था कि यह राजनीतिक सवाल है.

अब तक उसके माँ बाप कई बार बात बंद करने का इशारा कर चुके थे. उन्होंने पंखे का स्विच भी ऑन कर दिया जो मैंने रिकार्डिंग के लिए बंद कराया था.

माहौल अचानक एकदम गंभीर हो गया.

मै सोचने लगा कि क्या संयुक्त राष्ट्र एक धार्मिक मंच है और युगरत्ना जिन नेताओं को संबोधित करने न्यूयार्क गई थी वह कोई साधू महात्मा हैं.

मै सोनभद्र के उन लोगों के बारे में भी सोच रहा हूँ जिन्होंने अचानक इतनी उम्मीदें जगा ली हैं कि युगरत्ना वहां से आएगी और अपने एनजीओ के साथ उनके जीवन के मूल आधार जल, जंगल, ज़मीन और पहाड़ नष्ट होने के मुद्दे उठाएगी. 13 साल की युगरत्ना अब बच्ची नही रही. अब वह दुनियादारी और अपना नफ़ा नुकसान जानने लगी है.

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