'भारत भयंकर सूखे की चपेट में'

सूखा
Image caption भारत के कई राज्यों में गर्मी के मौसम में झीलें पूरी सूख गई थीं.

भारत के मौसम विभाग का कहना है कि 1972 के बाद देश सबसे ख़राब सूखे की चपेट में है क्योंकि मॉनसून की बारिश औसत से काफ़ी कम रही है.

मौसम विभाग के प्रवक्ता पीके बंधोपाध्याय का कहना है, ‘‘1972 के बाद इस साल मॉनसून के दौरान सबसे कम बारिश हुई है.इस वर्ष चार महीने की मॉनसून अवधि में बारिश औसत से 23 प्रतिशत कम रही है.’’

1972 में बारिश औसत से 24 प्रतिशत कम रही थी. इससे पहले 1979, 1987 और 2002 में बारिश औसत से 19 प्रतिशत कम रही थी.

बंदोपाध्याय का कहना है, ‘‘आधिकारिक रुप से मॉनसून की चार महीने की अवधि ख़त्म हो गई है. यह साल मॉनसून के हिसाब से बेहद ख़राब साल रहा है. ’’

मानसून के दौरान बारिश में कमी का मतलब है सूखा. सूखे का हर इलाक़े में अलग अलग प्रभाव पड़ रहा है. जहां दक्षिणी इलाक़ों में पानी ज़रुरत से सात प्रतिशत कम है वहीं उत्तर और पश्चिम के इलाक़ों में पानी ज़रुरत से 36 प्रतिशत कम है.

भारत के लाखों किसानों के लिए मॉनसून सिंचाई का बड़ा साधन रहा है और ख़राब मानसून से लाखों हेक्टेयर में फसल बर्बाद हो जाती है.

बारिश में कमी के कारण पहले से ही देश में चावल और गन्ने की खेती पर बुरा प्रभाव पड़ा है.

योजना आयोग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ संतोष मेहरोत्रा भी मानते हैं कि देश में सूखे जैसे हालात है लेकिन वो कहते हैं कि स्थिति उतनी बुरी नहीं है.

वो कहते है, '' देखिए साठ के दशक में और अस्सी के दशक में जो सूखा आया था स्थिति इस बार भी वैसी है लेकिन अच्छी बात ये है कि इस समय हमारे पास चावल का पर्याप्त भंडार है साल भर का. अगर अगले साल भी सूखा पड़ता है तो स्थिति बहुत ख़राब होगी लेकिन आम तौर पर ऐसा होता नहीं है.''

कम बारिश

इतना ही नहीं जलाशयों में कम पानी के कारण पनबिजली परियोजनाओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और सर्दियों में सिंचाई पर भी इसका प्रभाव पड़ा है.

खेती पर कम पानी का असर चीज़ों की क़ीमतों पर भी साफ दिखने लगा है. चीनी की क़ीमतें बढ़ गई है क्योंकि गन्ने की पैदावार कम होने की आशंका जताई जा रही है.

विभिन्न खाद्दान्नों की कम पैदावार का असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले महीने कहा था कि देश भयंकर सूखे की चपेट में है लेकिन देश में पर्याप्त मात्रा में खाद्दान्न है और कोई भूखा नहीं रहेगा.

विशेषज्ञों का कहना है कि देश में इस समय खाद्दान्न का पर्याप्त भंडार है.

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