भूमि अधिग्रहण के खिलाफ़ अड़े किसान

पश्चिमी उत्तर प्रदेश पिछले कुछ समय से किसानों व प्रशासनिक संघर्ष का पर्याय बन गया है. इस क्षेत्र में किसानों की भूमि को भारी उद्योग, सड़कें,टाउनशिप आदि के लिए अधिग्रहित किया जा रहा है.

इसे लेकर किसान और प्रशासन बार-बार आमने-सामने आ जाते हैं. चाहे वह नोएडा , दादरी , गाज़ियाबाद हो या फिर गंगा एक्सप्रेस वे के लिए भूमि अधिग्रहण का मामला .

हालांकि गंगा एक्सप्रेस वे का कार्य इस समय रुक गया है लेकिन किसानों के बीच सुगबुगाहट जारी है और अब नॉएडा से आगरा तक के लिए प्रस्तावित यमुना एक्स्प्रेस्स्वे की रुकावटें भी पीछा नहीं छोड़ रहीं हैं.

इन रुकावटों के चलते यह संभव नहीं दिख रहा है कि मार्ग निर्धारित समय में पूरा हो सकेगा.यमुना एक्सप्रेस वे नॉएडा से आगरा के बीच बनाया जा रहा है.

इस एक्सप्रेस वे के बन जाने के साथ ही आगरा से नोएडा की दूरी मात्र १६५ किलोमीटर रह जाएगी और पर्यटक इस दूरी को २ घंटों में पूरा कर सकेंगे.

विवाद

अगले साल भारत में कॉमनवेल्थ खेल होने हैं और लाखों देशी और विदेशी पर्यटक इन खेलों को देखने के साथ-साथ ही आगरा में ताज महल देखने आएँगे.

इसी कारण ये एक्सप्रेस वे केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में शामिल है. यमुना एक्सप्रेस वे के आस-पास की भूमि जेपी ग्रुप द्वारा सुनियोजित तरीके से विकसित की जानी है.

इस समय ये ज़मीन जेपी ग्रुप द्वारा टाऊनशिप विकसित करने के लिए अधिग्रहित की जा रही है. इस अधिग्रहण के लिए सरकारी स्तर पर भी घोषणा हो चुकी है .

शुरुआत में ४९१ हेक्टेयर ज़मीन के अधिग्रहण का काम पूरा हो चुका है.सिर्फ करार बाकी है लेकिन अपनी ज़मीनों को बचाने के लिए आगरा के चार गावों –गडी रामी,चौगान,चलेसर और भंगरा के किसान इस मुददे पर अब आर-पार की लड़ाई करने का मन बना चुके हैं.

किसानों, पुलिस व जेपी ग्रुप के लोगों के बीच झड़पें आम बात हों गई हैं. धीरे-धीरे यह मामला राजनीतिक रूप लेता जा रहा है.

राजनीतिकरण

किसानों को अपने पक्ष में करने के लिए हर राजनीतिक दल इस कोशिश में जुटा है कि वह इस मामले को मुद्दा बनाकर किसानों का समर्थन प्राप्त कर ले.

जेपी ग्रुप के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है, “ एक्सप्रेस वे सड़क मार्ग के लिए ज़मीन का अधिग्रहण पहले ही हो चुका है, इसका कार्य चालू है अब अप्रिय स्थितियां सुनियोजित तरीके से विकसित की जाने वाली ज़मीन को लेकर हैं. राजनीतिक दलों द्वारा इसे मुद्दा बनाए जाने के कारण परेशानियां आ रहीं हैं.अधिकतर किसान अपनी भूमि देने को भी तैयार हैं.”

उन्होंने यह भी बताया कि यमुना एक्स्प्रेस्स्वे अपने निर्धारित समय में पूर्ण हो जाएगा.

अनुबंध के अनुसार इसका निर्माण अप्रैल २०१३ तक पूरा किया जाना है लेकिन कॉमनवेल्थ खेलों को देखते हुए कंपनी की प्राथमिकता है कि इनके आयोजन से पूर्व ही इसका कार्य पूरा हो जाए.

वहीं इस अधिग्रहण के संबध में आगरा के उप ज़िलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति ) बीके सिंह ने बताया कि अधिग्रहण का विरोध तो हर जगह होता है.

किसानों की माँग

किसानों की मांगो के संबंध में उनका कहना है, किसानों की पहली मांग यह है कि वह अपनी ज़मीन नहीं देंगे और यदि जमीन दे देंगे तो खेती कहाँ करेंगे. दूसरी मांग यह है कि यदि ज़मीन देंगे तो उसका मुआवज़ा मूल्य कम से कम ५००० रूपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मिले.

वहीँ यमुना एक्सप्रेस वे अथोरिटी ४४६ रूपये प्रति वर्ग मीटर की दर से इसका मूल्य दे रही है.एक तरफ़ किसान आंदोलन कर रहे हैं वहीँ ४९१ मैं से ६१ हेक्टाएर ज़मीन का करार भी हो चुका है.

किसानों के तेवरों को देखते हुआ कानून व्यस्था के संबंध में एसपी (पश्चिम) श्री कृष्ण नें बताया, क़ानून व्यवस्था को लेकर वे चौकन्ने हैं. किसानों के साथ बातचीत चल रही है. वार्ता के ज़रिए सभी मसले हल हो जाएँगे. कानून व्यवस्था को कहीं कोई चुनौती नहीं मिलने जा रही है.

आगरा के नज़दीक फिरोज़ाबाद लोकसभा का उपचुनाव होना है जो समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस्तीफा देने से रिक्त हुई है.

चुनावी राजनीति

यह चुनाव कांग्रेस ,सपा ,बसपा सभी पार्टियों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है.किसानों के मामले में कोई पार्टी यह नहीं चाहेगी कि किसानो की वजह से चुनाव में उन्हें कोई हानि उठानी पड़े.

जहाँ कांग्रेस प्रत्याशी एक मोर्चे पर किसानो के साथ खड़े दिखाई देते हैं वहीं रालोद मुखिया अजीत सिंह नें भी इस शेत्र के किसानों पर अपनी पकड़ बरकरार रखने के लिए अपने पुत्र सांसद जयंत चौधरी को किसानों के साथ खडा कर दिया है.

गौरतलब है कि आगरा के पास की हाथरस लोक सभा क्षेत्र से उन्हीं की पार्टी की सारिका सिंह बघेल सांसद हैं. वहीं सादाबाद विधान सभा क्षेत्र से डाक्टर अनिल चौधरी रालोद के विधायक हैं.

रालोद का यहाँ के किसानों पर खासा प्रभाव है. रालोद यह नहीं चाहता कि किसान इस मुद्दे पर की गई पहल को लेकर किसी और राजनीतिक दल के साथ रिश्ता जोड़ लें.

इस क्षेत्र के किसान किसी भी कीमत पर अपनी ज़मीनें देने को तैयार नहीं है. किसानों का कहना है कि वे जान दे देंगे पर ज़मीन नहीं.

भूमि अधिग्रहण के खिलाफ जयंत चौधरी नें मंगलवार को खंदोली क्षेत्र में एक विशाल रैली का आयोजन कर यह ऐलान कर दिया कि किसानों की उपजाऊ ज़मीन को किसी भी कीमत पर अधिग्रहित नहीं होने दिया जायेगा.

हालाँकि इन तमाम राजनीतिक दावों व किसानों द्वारा ज़मीन न देने की बात के पीछे यह माना जा रहा है कि यमुना एक्सप्रेस वे का निर्माण तो हो ही रहा है लेकिन उसके आस-पास जिस ज़मीन पर सुनियोजित विकास व टाउनशिप विकसित की जानी है उस भूमि का किसानों को अधिक से अधिक दाम मिल सके.

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