'बलात्कार मामले में बात नहीं की'

Image caption शोपियां मामले पर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं

भारत के केंद्रीय जांच ब्यूरो ने कश्मीर के शहर शोपियां में दो औरतों के कथित बलात्कार और हत्या के मामले में उन मीडिया रिपोर्टो से खुद को अलग कर लिया है जिसमें ये कहा जा रहा था कि उन दो औरतों में से एक के साथ बलात्कार नहीं हुआ था.

एडिशनल सॉलीसिटर जनरल अनिल भान ने श्रीनगर में उच्च न्यायलय की डिविज़न बेंच को बताया कि सीबीआई के किसी भी अधिकारी ने न तो मीडिया से बात की है न ही बात करने की मंशा है.

डिविज़न बेंच का नेतृत्व कर रहे मुख्य न्यायधीश बरिन घोष ने कहा कि अदालत किसी भी सीबीआई अधिकारी के इस मामले में मीडिया से बात करने पर रोक लगा सकती थी लेकिन एडिशनल सॉलीसिटर जनरल ने उन्हे भरोसा दिलाया था कि सीबीआई अधिकारी मीडिया से बात नहीं करेंगे.

अनिल भान इस मामले में डिविज़न बेंच के सामने सीबीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

निष्पक्षता पर उठाए सवाल

इससे पहले कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रमुख मियां क़यूम ने ये कहा था कि दो औरतों में से एक, असिया के कौमार्य के बारे में सीबीआई ने जानबूझकर मीडिया में खबरें छपवाई थीं.

उन्होंने कहा कि इससे बार ऐसोसियेशन के उस अंदेशे को बल मिलता है कि राज्य सरकार ने शोपियां मामले की जांच सीबीआई को इसीलिए सौपां ताकि सच्चाई को दबाया जा सके.

मियां क़यूम ने कोर्ट को कहा, “ मैंने यही कहा था कि ये मामला ख़ुद ही धीरे-धीरे मर जाएगा अगर इसे सीबीआई को सौंप दिया जाए.”

बार एसोसिएशन ने सीबीआई की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं. उनके अनुसार तीन साल पहले हुए सेक्स स्कैंडल मामले में भी सीबीआई की भूमिका दरअसल का़नून का मज़ाक था.

क़यूम ने कहा कि उनके कोई भी वकील अब इस मामले मे अदालत में पेश नहीं होना चाहते हैं. हालांकि मुख्य न्यायधीश बारिन घोष ने कहा कि हाई कोर्ट पूरी जांच पर नज़र बनाए रखेगा इसके बावजूद कि असली याचिकाकर्ता इस मामले से बाहर हो जाएं.

उन्होंने कहा कि जब तक ये गुत्थी सुलझ नही जाती इस मामले को बंद नहीं किया जाएगा. हाई कोर्ट ने इस पूरे मामले की निगरानी तब शुरू की थी जब बार एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर जनहित याचिका दायर की थी.

कोर्ट ने सीबीआई को जांच टीम का पूरा ब्यौरा और जो डाक्टर इन दो औरतो के शव परीक्षण कर रहे हैं उनका भी ब्यौरा देने को कहा है. ये मामला अक्तूबर 13 को सुनवाई के लिए फिर आएगा.

पिछले जून महीने में इन दो महिलाओं की कथित हत्या और बलात्कार के मामले के बाद से ही कश्मीर मे लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

इससे पहले दो बार न्यायिक जांच कराई जा चुकी है.

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