दसवीं में ग्रेडिंग प्रणाली की पड़ताल

दसवीं के छात्रों के लिए ये कदम ऐतिहासिक बताया जा रहा है

केंद्र सरकार दसवीं की बोर्ड परीक्षाओं को ख़त्म करने का और ग्रेडिंग प्रणाली लागू करने का फैसला कर चुकी है. पर इस नई प्रणाली को समझने के लिए भारत में माध्यमिक शिक्षा प्रणाली के इतिहास को टटोलने की ज़रुरत है.

साल 2011 से केंद्रीय शिक्षा माध्यमिक बोर्ड द्वारा आयोजित दसवीं की परीक्षाएं ख़त्म कर दी जाएँगी और विद्यार्थियों का आंकलन ग्रेडों में किया जाएगा.

स्वाधीनता के बाद से लगभग सभी भारतीय स्कूलों में शिक्षा प्रणाली जस की तस ही रही. पाठ्यक्रम में बदलाव तो होता रहा लेकिन परीक्षाओं के नतीजे आंकड़ों में ही मिलते रहे हैं.

ख़ास तौर पर हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के नतीजे हमेशा से ही आंकड़ों और प्रतिशत में ही दिए जाते है और विद्यार्थियों को एक लंबे और तनावपूर्ण दौर से गुज़र कर उच्च शिक्षा में कदम रखना पड़ता रहा है. पर सरकार के इस बड़े फैसले से दशकों से चली आ रही अंक मिलने की प्रथा को ख़त्म कर दिया जाएगा.

मानव संसाधन मंत्री कपिल सिबल ग्रेडिगं प्रणाली के पक्षधर रहे हैं.

सरकारी फैसले के मुताबिक सीबीएसई की दसवीं परीक्षाओं में ग्रेडिंग प्रणाली इसी शिक्षा सत्र से लागू होगी .

पर क्या भारतीय शिक्षा क्षेत्र के लिए ये फैसला बिलकुल अनोखा है जिसे ऐतिहासिक कहा जा सकता है?

दिल्ली के प्रतिष्ठित स्प्रिन्ग्डेल्स स्कूल की प्रिंसिपल अनीता मुल्ला वातल कहती हैं, "ये सिस्टम नया नहीं है और कई सालों से इसपर काम होता आ रहा है. शिक्षाविद् और नीति निर्धारक इसपर काम कर रहे हैं. सीबीएसई स्कूलों में ग्रेडिंग यूँ भी आठवीं कक्षा तक पहले से मौजूद है."

जानकारों का ये भी मानना है की सीबीएसई के अलावा भी कई स्कूलों ने अपने यहाँ कक्षा छह और सात में ग्रेडिंग प्रणाली को लागू कर रखा है पर दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं के लिए स्कूलों को सीबीएसई, आइसीएससी या फिर प्रदेश माध्यमिक बोर्डों के अर्न्तगत ही चलना पड़ता है.

"इसमें एक नकारात्मक बात ये है की दसवी के बच्चे बोर्ड परीक्षा के आदी नहीं रहेंगे और साल भर ग्रेड के लिए पढेंगे. कक्षा बारह में एकाएक उन्हें बोर्ड परीक्षा देनी पड़ेगी और वे मानसिक दबाव में ही रहेंगे क्योंकि अंकों में उनका आंकलन पहले कभी नहीं हुआ रहेगा."

माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के शिक्षा निदेशक राजीव कटयाल

हालांकि सरकार ने इस फैसले के साथ-साथ ये भी घोषणा की है की जो छात्र परीक्षा देने के इच्छुक हैं वो आगे भी दे सकते हैं. केंद्र सरकार का ये भी मानना है की सभी राज्य इस नई प्रणाली से सहमत हैं और वो इसे जल्द ही लागू भी कर सकते हैं.

लेकिन कुछ जानकार इस नए कदम पर सावधानी पूर्वक आगे बढ़ने की भी सलाह देते हैं.

माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के शिक्षा निदेशक राजीव कटयाल की राय है, "इसमें एक नकारात्मक बात ये है की दसवीं के बच्चे बोर्ड परीक्षा के आदी नहीं रहेंगे और साल भर ग्रेड के लिए पढेंगे. कक्षा बारह में एकाएक उन्हें बोर्ड परीक्षा देनी पड़ेगी और वे मानसिक दबाव में ही रहेंगे क्योंकि अंकों में उनका आंकलन पहले कभी नहीं हुआ रहेगा."

तो क्या सरकार को दसवीं के साथ-साथ बारहवीं कक्षा में भी ग्रेडिंग प्रणाली नहीं लागू कर देनी चाहिए थी जिससे छात्र मानसिक दबाव से बच सकें? राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् के प्रमुख कृष्ण कुमार कहते हैं , "प्रक्रिया शुरू हो रही है. अध्यापकों को और विद्यार्थियों को धीरे धीरे इसकी आदत पड़ेगी. मुझे आशा है ये काम जल्द होगा और इसे सीबीएसई को ही करना है."

"छात्रों से मेरी लगातार बात हो रही है और वे इस कदम से खुश हैं, उनमे उत्साह भरपूर है. लेकिन जो भी थोड़ो-मोडा विरोध है वो कुछ माँ-बाप से ही देखने को मिलता है क्योंकि वही लोग बच्चों पर दबाव भी बनाते है. अब अच्छी बात है की ये जो जकडा हुआ सिस्टम था वो ख़त्म होने जा रहा है और 14-15 साल के बच्चे खुल कर जी सकेंगे."

अनीता मुल्ला वातल, दिल्ली के स्प्रिन्गडेल्स स्कूल की प्रिंसिपल

समान प्रणाली के साथ ही सवाल ये भी है कि अगर सरकार ग्रेडिंग प्रक्रिया को सीबीएसई में शुरु करने जा रही है तो फिर देश के अन्य प्रमुख बोर्ड आइसीएससी में इसे क्यो नहीं आज़माया जा रहा है?

अनीता मुल्ला वातल का मत है की इसमें अभी समय है. वे कहती हैं, " इतना बड़ा देश है, किसी नई चीज़ को लाने में वक़्त लगता है. छठे वेतन आयोग को ही देख लीजिए कितना समय लगा, तो शिक्षा क्षेत्र के ऊपर ये एकदम से क्यों थोप दिया जाए.बहुत अच्छी बात है की सीबीएसई जिसके कि 11,000 स्कूल हैं वहां ये शुरू होगी और फिर तो इसे फैलना ही है."

अनीता कहती है, "छात्रों से मेरी लगातार बात हो रही है और वे इस कदम से खुश हैं, उनमें उत्साह भरपूर है. लेकिन जो भी थोड़ो-मोड़ा विरोध है वो कुछ माँ-बाप से ही देखने को मिलता है क्योंकि वही लोग बच्चों पर दबाव भी बनाते है. अब अच्छी बात है की ये जो जकड़ा हुआ सिस्टम था वो ख़त्म होने जा रहा है और 14-15 साल के बच्चे खुल कर जी सकेंगे."

ज़ाहिर तौर पर दसवीं की परीक्षाओं को ख़त्म कर ग्रेडिंग प्रणाली लागू करना एक नयी पहल है. लेकिन खुद विद्यार्थी और शिक्षक इससे क्या खोते हैं और क्या पाते हैं, इस पर टिपण्णी करना अभी थोड़ी जल्दबाज़ी ही होगी.

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