चुनावी मौसम में वादों की भरमार

चुनावों के वक़्त वायदे करना कोई नई बात नहीं है. हरियाणा में चुनावी वायदों की जैसे भरमार ही हो गई है.

उम्मीद के मुताबिक किसानों से किए गए तमाम वायदे तो हैं हीं, लेकिन पार्टियों ने मुफ़्त सुविधाएं देने के इतने सारे वायदे कर डाले हैं जैसे कि उनमें कोई प्रतियोगिता लगी हो.

प्रेक्षकों का कहना है कि कांग्रेस को तो किसी चुनाव घोषणा पत्र की ज़रूरत ही नहीं है और उन्होंने पुराने घोषणा को ही अपडेट कर नए घोषणापत्र का चोला पहना दिया है.

माना जा रहा है कि कांग्रेस को सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि विपक्ष बंटा हुआ है. 2009 लोकसभा चुनाव में 10 में से नौ सीटें जीतने के बाद जहाँ कांग्रेस नेता जीत के प्रति आश्वस्त दिख रहे हैं, शायद यही वजह थी कि सरकार ने चुनाव को महीनों पहले ही करवाने की सिफ़ारिश कर डाली.

दावे ही दावे

कांग्रेस हरियाणा को ‘नंबर वन’ बनाने का दावा कर रही है तो उधर भाजपा की चुनावी गुहार किसी बेहद थके हुए व्यक्ति की उम्मीदों भरी पुकार जैसी है – सबको परखा बार बार, अबकी बार भाजपा सरकार.

सत्ता की एक और दावेदार भारतीय राष्ट्रीय लोकदल की बात करें तो पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के पुत्र और पार्टी महासचिव अजय चौटाला कहते हैं कि वो 36 चुनाव क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं और परिस्थितियाँ कांग्रेस के विपरीत हैं.

हरियाणा जनहित कांग्रेस के कुलदीप विश्नोई सत्ता के सिंहासन पर बैठने को नहीं तो कम से कम उसे सहारा देने को लेकर आश्वस्त हैं.

पार्टी दफ़्तरों की बात करें तो वहाँ घोषणापत्रों के ख़त्म होने में देर नहीं लगती. इसलिए भाजपा के घोषणापत्र की प्रति लेने जब हम पार्टी महासचिव और हरियाणा प्रभारी विजय गोयल के घर पहुँचे तो पहले उन्होंने एक वाक्य पर अपनी कलम चलाई और उसे काटा - ‘संस्कृति के नाम पर पाश्चात्य संगीत के भोंडापन को कानून बनाकर रोका जाएगा’ –और उसके बाद हमें वो प्रति दी.

उनका कहना है कि इस वाक्य को गलत ढंग से समझा गया है, उनकी पार्टी भौंडेपन के खिलाफ़ है, इसलिए उन्होंने उस वाक्य को काटा. याद रहे कि इस वाक्य को लेकर मीडिया में काफ़ी बातें कही गई हैं.

पूरे होंगे वायदे ?

बहरहाल भाजपा के 16-पन्नों वाले घोषणा पत्र में 12 प्रतिशत विकास दर की बात है, हरियाणवी संस्कृति के फिर से उत्थान की बात है, कृषि क्षेत्र में 15 घंटे बिजली सुनिश्चित करने का वायदा है और ये भी कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अधिकृत ज़मीन का मुआवज़ा एक करोड़ रुपए प्रति एकड़ दिया जाएगा.

विजय गोयल कहते हैं, “महंगाई, बिजली, पानी, कानून व्यवस्था, ये पार्टी के बड़े मुद्दे हैं. 12 प्रतिशत विकास दर पाना कोई बड़ी बात नहीं, अधिकृत ज़मीन का एक करोड़ का मुआवज़ तो दरअसल कम है. उसकी कीमत तो पाँच करोड़ तक जानी चाहिए.”

वो कहते हैं कि उनकी पार्टी ने ऐसा कोई वायदा नहीं किया जो पूरा नहीं किया जा सके.

उधर भजनलाल की जनहित कांग्रेस का घोषणा पत्र भी वायदों से लबालब है – 2000 रुपए बेरोज़गारी भत्ता, 2000 रुपए बुढ़ापा पेंशन और महिलाओं के लिए 2000 रुपए घरेलू भत्ता.

साथ ही सरकारी और निजी कंपनियों में हरियाणा के लोगों के लिए 80 प्रतिशत नौकरी आरक्षित करने का वायदा भी. किसानों के लिए पीने और सिंचाई के पानी के वायदे भी इस सूची का हिस्सा हैं.

कुलदीप विश्नोई कहते हैं, “ये वायदे कोई नए नहीं हैं. इनमें से 80 प्रतिशत वायदे वो हैं जो मैने दो साल पहले किए थे.”

जहाँ तक 80 प्रतिशत नौकरियों के आरक्षण का प्रश्न है, कुलदीप कहते हैं कि उनका नज़रिया राज ठाकरे वाला नहीं है.

उनका कहना है, “मैं पढ़ा लिखा व्यक्ति हूँ. मेरी वफ़ादारी हरियाणा और उसके नौजवानों के प्रति है. मैने 20 प्रतिशत नौकरियाँ बाहर के लोगों के लिए छोड़ने की बात की है.”

घोषणापत्र

उधर अजय चौटाला सुरक्षा की अहमियत पर ज़ोर देते हैं. वे कहते हैं, “कांग्रेस सरकार ने अपना एक भी वायदा पूरा नहीं किया. इन्होंने कहा था कि हम भय, भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देंगे, इन्होंने कहा था कि हर घर को रोज़गार देंगे, इन्होंने कहा था कि हरियाणा के लिए अलग से हाईकोर्ट बनाएंगे, गुड़गाँव की तर्ज़ पर चार नए शहर बसाएंगे, इनका तो एक भी वायदा पूरा नहीं हुआ.”

अजय चौटाला भरोसा दिलाते हैं कि उनकी पार्टी ने जो भी वायदे किए हैं वो उसे पूरे करेंगे. पार्टी ने गरीब परिवारों को हर महीने 25 किलो अनाज मुफ़्त देने का वायदा किया है, हर परिवार को गैस कनेक्शन (सिलेंडर चूल्हा सहित) और पीने का पानी मुफ़्त देने का वायदा किया है. साथ ही सस्ते ब्याज़ पर कर्ज़ और किसानों को बेहतर समर्थन मूल्य देने की बात भी कही गई है.

उधर कांग्रेस के घोषणा पत्र ने शायद ही किसी वर्ग को छोड़ा हो. राजीव, सोनिया और राहुल गाँधी के अलावा मनमोहन सिंह और हुड्डा की तस्वीर से सुसज्जित 34 पन्नों में किसानों को महाजनों के चंगुल से छुडाने के लिए नई नीति की बात कही गई है, मवेशियों को ढेर सारी सुविधाएँ देने की बात कही गई है, 2012-13 तक हरियाणा को बिजली के मामले में अपने पैर पर खड़ा करने की बात कही गई है, विज्ञान शिक्षा मिशन की शुरुआत की बात कही गई है और हरियाणा के लिए एक अलग उच्चन्यायालय और मोबाईल कोर्ट की शुरुआत की बात कही गई है.

साथ ही पार्टी ने कहा है कि हरियाणा में सिखों की भावनाओं के मुताबिक एक अलग सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को लेकर बनी चढ्ढा कमेटी की रिपोर्ट पर उचित कार्रवाई होगी.

इसके अलावा कांग्रेस ने पत्रकारों को भी खुश करने की कोशिश की है. पत्रकारों के लिए स्मार्ट कार्ड, सरकारी अस्पतालों में मुफ़्त चिकित्सा, लाईफ़टाईम अचीवमेंट पुरस्कार देने और पत्रकारों की बीमा स्कीम का और प्रसार करने की भी बात की गई है.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष फ़ूलचंद मुलाना मानते हैं कि पिछले चुनावों में पार्टी ने जितने भी वायदे किए थे जैसे प्रदेश के लिए एक अलग न्यायालय बनाने का, वो वायदे पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन वो कहते हैं कि कोई भी काम रुका नहीं है और काम चल रहा है.

चंडीगढ़ स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेवलपमेंट ऐंड कम्युनिकेशन के डॉक्टर प्रमोद कुमार कहते हैं कि हालांकि कम ही पार्टियाँ घोषणापत्रों पर अमल करती हैं, घोषणापत्र एक महत्वपू्र्ण दस्तावेज़ हैं. इससे समाज में बहस छिड़ती है और पता चलता है कि पार्टियों ने कितने वायदे किए और कितने पूरे किए.

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