गांधीजी वाली कलम पर विवाद

स्विस कंपनी मॉं ब्लॉं ने जिस कलम में गांधीजी की छवि इस्तेमाल की है उसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है.

पीटीआई के मुताबिक केरल हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें भारत में इस कलम की मार्किटिंग को चुनौती दी गई है.

कंपनी ने इस कलम की क़ीमत करीब 14 लाख रुपए रखी है और इसमें गांधीजी का नाम और छवि का उपयोग किया गया है.

सीमित एडिशन वाले इस पेन को तुषार गांधी ने 29 सितंबर को लॉन्च किया था.

लेकिन याचिकाकर्ता डिजो कापेन ने अदालत में दलील दी है कि महात्मा गांधी के नाम पर लक्ज़री पेन बनाना और बेचना ग़लत और अवैध है. डिजो कोट्याम में उपभोक्ता शिक्षा केंद्र से जुड़े हुए हैं.

उनका तर्क था कि गांधी के नाम या छवि को एक वस्तु की तरह किसी व्यापारिक मकसद के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.

मूल्यों के ख़िलाफ़

कापेन के मुताबिक गांधीजी के नाम वाला 14 लाख का पेन उन सब मूल्यों के उलट है जिनके लिए गांधीजी जाने जाते थे.

लेकिन तुषार गांधी ने इस कीमती कलम का विरोध करने वालों पर हैरत जताई है और कहा कि महात्मा गांधी की छवि का इस्तेमाल विज्ञापन के लिए लंबे समय से होता रहा है.

एजेंसियों के मुताबिक ऐसी 241 कलम बिक्री के लिए रखी जाएँगी. डांडी मार्च में भी गांधीजी 241 मील चले थे और इसी को ध्यान में रखते हुए केवल 241 पेन बनाए गए हैं.

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