अलगाववादियों के साथ वार्ता की तैयारी

उमर फ़ारूक़
Image caption अलगाववादियों से वार्ता चार साल बाद होगी

भारत प्रशासित कश्मीर के अलगाववादी नेताओं और केंद्र सरकार के बीच वार्ता फिर शुरू करने की तैयारी चल रही है.

ऑल पार्टी हुर्रियत कॉंफ्रेंस के एक धड़े के प्रमुख मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार के साथ बातचीत शुरू करने के लिए अनाधिकारिक तौर पर संपर्क कायम किए गए हैं.

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत दो महीने के भीतर शुरु होने की उम्मीद है.

हालाँकि उन्होंने ये भी कहा कि अलगाववादी पाकिस्तान के नेताओं के साथ भी बातचीत करेंगे.

उमर फ़ारूक़ ने कहा कि वह दिल्ली या इस्लामाबाद कूच करने से पहले अलगाववादियों के बीच सहमति बनाने की कोशिश करेंगे. ख़ास कर उन्होंने कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट के नेता यासिन मलिक के साथ विचार विमर्श के संकेत दिए.

उनका कहना है कि भारत सरकार का बातचीत के लिए इच्छुक होना ये दर्शाता है कि वो कश्मीर को एक राजनीतिक मुद्दा मानती है.

उन्होंने ये भी कहा कि भारत पर वार्ता शुरू करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव है.

वो कहते हैं, "अमरीका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों में ये राय बनी है कि कश्मीर को हल किए बिना अफ़ग़ानिस्तान में सफलता नहीं मिल सकती. इसलिए वे चाहते हैं कि भारत लचीलापन दिखाए और वार्ता की पाकिस्तान की पेशकश पर सकारात्मक रुख़ अपनाए."

उमर फ़ारूक़ की राय में अब भारत सरकार समझ चुकी है कि कश्मीर का हल द्विपक्षीय वार्ता से नहीं हो सकता, इसीलिए भारत सरकार अलगाववादी नेताओं को पाकिस्तान जाने की अनुमति दे रही है.

हुर्रियत नेता का कहना है, 'हम भारत और पाकिस्तान के किसी भी प्रस्ताव पर खुले दिमाग से विचार करेंगे.'

उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने कश्मीर दौरे पर कोई राजनीतिक संदेश देंगे.

संबंधित समाचार