कांग्रेस की रणनीति हुड्डा के इर्द-गिर्द

Image caption कांग्रेस का दारोमदार भूपिंदर सिंह हुड्डा पर टिका हुआ है

एक भी वोट जो किसी और को जाएगी, आप ये सोच लेना कि वो वोट चौधरी भूपिंदर सिंह हुड्डा जी के खिलाफ़ गिनी जाएगी..

ये कहना था रोहतक के सांसद और निवर्तमान मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा का.

रोडशो पर लंबे चौड़े काफ़िले में निकले दीपेंद्र जहाँ कहीं भी जा रहे हैं, कुछ इसी तरह से लोगों को अपनी पार्टी के लिए वोट करने के लिए कह रहे हैं. तालियों की गड़गड़ाहट औऱ समर्थकों के नारों के बीच दीपेंद्र लोगों से कह रहे हैं कि हरियाणा में कांग्रेस की लहर है.

उधर कांग्रेस प्रवक्ता वेद प्रकाश कहते हैं कि दीपेंद्र पक्ष और विपक्ष की बात नहीं कर रहे थे बल्कि पार्टी के बागियों की तरफ़ वोट ना जाने पाए, इसलिए उन्होंने ऐसा बयान दिया होगा.

बहरहाल माना जा रहा है कि हरियाणा में कांग्रेस की चुनावी रणनीति भूपिंदर सिंह हुड्डा के इर्द-गिर्द ही घूम रही है.

लेकिन सवाल फिर वही कि हरियाणा जहाँ बेरोज़गारी है, अशिक्षा है, मूलभूत सुविधाओं पर काफ़ी काम किए जाने की ज़रूरत है, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है, उस प्रदेश के बारे में कई प्रेक्षक कह रहे हैं कि यहाँ कांग्रेस का पलड़ा इसलिए भारी हो सकता है क्योंकि विपक्ष बिखरा हुआ है और कांग्रेस को वोट भूपिंदर सिंह हुड्डा की साफ़ सुधरी छवि की वजह से मिल रहे हैं.

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के राजनीति विभाग के प्रमुख प्रोफ़ेसर जीके कर कहते हैं, "हो सकता है बढ़ती हुई महंगाई का थोड़ा बहुत असर चुनाव पर हो लेकिन इस बार चुनाव में कोई भी ख़ास मुद्दा उभर कर आया है. कुछ महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन का हरियाणा पर काफ़ी असर पड़ा है क्योंकि हरियाणा दिल्ली से सटा हुआ राज्य है. साथ ही हरियाणा के मुख्यमंत्री की छवि किसी जेंटलमैन या सभ्रांत व्यक्ति की है."

चौटाला का व्यवहार

माना जाता है कि 2005 में कांग्रेस को दिया गया वोट दरअसल ओमप्रकाश चौटाला के राज के ख़िलाफ़ वोट था. लोग चौटाला राज से कथित तौर से इतने आंतकित हुए कि उन्हें भूपिंदर सिंह हुड्डा का नर्म रवैया और उनकी अच्छी छवि पसंद आई.

रोहतक में वरिष्ठ पत्रकार पवन बंसल कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि ओमप्रकाश चौटाला के वक्त विकास नहीं हुआ, उन्होंने पंचायतों को धन भी मुहैया करवाया लेकिन उनकी समस्या थी उनका कार्यकर्ताओं, अफ़सरों, विधायकों के साथ कथित तौर पर अहंकारी व्यवहार.

वो कहते हैं कि हुडा सरकार ने अपने विरोधियों के खिलाफ़ मुकदमा नहीं दर्ज किया और कोई भी उनसे कैसे भी बात करे, उसका जवाब वो बहुत शांति से देते हैं.

उधर ओमप्रकाश चौटाला अपने व्यवहार के बारे में कही जा रही बातों को मीडिया का प्रोपेगैंडा बताते हैं.

रोहतक में हमारी मुलाकात हुई कुछ लोगों से जिन्होंने कहा कि वो भूपिंदर सिंह हुड्डा को वोट देंगें. उनका कहना था कि दोनो भूपिंदर हुड्डा और उनके पुत्र साफ़ सुथरी छवि के हैं और इसलिए वो उन्हें वोट देंगे. इन लोगों को सबसे अच्छी बात ये लगती है कि ये ‘पढ़े लिखे हैं’.

विपक्ष भी मानता है कि भूपिंदर सिंह हुड्डा की साफ़ छवि का फ़ायदा कांग्रेस को हो सकता है लेकिन उनका तर्क है कि अपनी छवि को बचाए रखने के लिए भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कड़े फ़ैसले लेने से गुरेज़ किया.

एक भाजपा नेता का कहना था, "भूपिंदर सिंह हूडा किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे पर फ़ैसला लेने से हिचकिचाते हैं जिससे मामला घिसटता चला जाता है. सरकार ने बिजली का करोड़ों का ऋण तो माफ़ किया, लेकिन उनका क्या कसूर जो समय से बिजली का बिल भरते आ रहे थे. कसूरवार लोगों से बिल की रकम वापस लेने की बजाय उन्होंने उनका बिल माफ़ करना बेहतर समझा. ये कारण भी हैं जिनकी वजह से वो मक़बूल हैं."

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