'आत्मरक्षा में हमले की अनुमति'

भारतीय रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा है कि भारतीय वायु सेना को नक्सल विरोधी अभियान के दौरान 'आत्मरक्षा के लिए जवाबी हमला करने की अनुमति' दी जाएगी.

उन्होंने कहा कि सरकार आईएएफ़ को नक्सल विरोधी अभियान में सीधे-सीधे शामिल नहीं करेगी क्योंकि ये काम राज्य सरकार और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों का है.

नई दिल्ली में पत्रकारों से उन्होंने कहा, "पहले ऑपरेश्ननल बारीकियों और कार्यपद्धति को ध्यानपूर्वक तैयार किया जाएगा, उसके बाद ही हमले की अनुमति दी जाएगी लेकिन सिर्फ़ आत्मरक्षा के लिए. जब हम इजाज़त देंगे तो पहले वायु सेना को बताएँगे."

उन्होंने कहा कि नक्सलवादियों के ख़िलाफ़ अभियान में वायु सेना का सीमित रोल होगा और वो अर्धसैनिक बलों को इलाक़ों तक पहुँचाने या हताहतों को घटनास्थलों से ले जाने का ही काम करेगी.

रक्षा मंत्री का कहना था कि सरकार की नीति स्पष्ट है कि आंतरिक सुरक्षा मामलों से निपटने के लिए जहाँ तक हो सके सेना का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.

नक्सली हमलों में तेज़ी

कुछ दिन पहले भारतीय वायु सेना ने रक्षा मंत्रालय से अनुमति माँगी थी कि अगर माओवादी उसके हेलीकॉप्टरों या कर्मचारियों पर हमला करते हैं तो वो आत्म रक्षा में नक्सलियों पर हमला कर सके.

रक्षा मंत्रालय से भारतीय वायु सेना के अनुमति मांगने पर माओवादियों ने कड़ी टिप्पणी की थी.

बीबीसी के साथ बातचीत में कुछ दिन पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के पोलित ब्यूरो के सदस्य कोटेश्वर राव यानी किशनजी ने वायु सेना के जवानों से आग्रह किया था कि वे ऐसा क़दम उठाने से पहले तीन बार सोचें.

केंद्र सरकार की ये घोषित नीति रही है कि आंतरिक सुरक्षा मामलों में सेना को शामिल नहीं किया जाता और वायु सेना के प्रस्ताव पर सुरक्षा मामलों की समिति (सीसीएस) को विचार करना होगा.

नकस्लवादियों से निपटने के लिए सीसीएस ने कुछ दिन पहले ही एक योजना तैयार की है जिसमें कुछ ज़िलों में माओवादियों के ख़िलाफ़ बड़ा अभियान चलाया जाएगा.

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