कश्मीर में हिंसा में कमी

कश्मीर
Image caption सेना का मानना है कि चरमपंथी हमलों में कमी आई है

पिछले कुछ वर्षों में भारत प्रशासित कश्मीर में हिंसा में भारी कमी आई है. अब वहाँ हालात सामान्य हो चले हैं. हिंसा की घटनाएं अब भी होती हैं लेकिन वे छुटपुट हैं.

हालांकि सेना के अधिकारियों का कहना है कि सतर्कता में कमी नहीं की जाएगी.

उनका कहना है कि राज्य में अब भी लगभग आठ सौ चरमपंथी सक्रिय हैं.

लेह और करगिल को छोड़कर राज्य के सभी ज़िले अब भी आधिकारिक रूप से अशांत क्षेत्र घोषित हैं.

इसके तहत सेना और अर्धसैनिक बलों को तलाशी और गिरफ़्तार करने और संदेह होने पर मारने का अधिकार प्राप्त है.

सेना का कहना है कि हाल में नियंत्रण रेखा से घुसपैठ की कोशिशें तेज़ हुईं हैं लेकिन अधिकांश घुसपैठिए मारे गए हैं. लेकिन कुछेक चरमपंथी घुसपैठ करने में कामयाब भी हुए हैं.

हाल में सेना और अर्धसैनिक बलों पर श्रीनगर में हुए हमलों ने अधिकारियों को चिंतित कर दिया है.

उनका मानना है कि चरमपंथी फिर से संगठित हो रहे हैं.

ऐसी ख़बरें हैं कि वे आधुनिक हथियारों और संचार उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसकी वजह से भारतीय सेना को भारी नुक़सान उठाना पड़ रहा है.

बदला माहौल

लेकिन कुलमिलाकर राज्य में माहौल बदला हुआ है. ये हाल के चुनावों में लोगों की भारी भागीदारी से स्पष्ट हुआ है.

इन दिनों राज्य में कुछ चरमपंथी गुट सक्रिय हैं लेकिन वे अब हमलों की ज़िम्मेदारी यदाकदा ही लेते हैं जबकि पहले वो अक्सर ऐसा किया करते थे.

हालांकि भारतीय अधिकारी अधिकतर हमलों के लिए लश्करे तैबा को ज़िम्मेदार ठहराते हैं. कभीकभार हूजी और जैशे मोहम्मद का भी नाम सामने आता है.

जबकि जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ़) ने 1994 में ही एकतरफा युद्धविराम की घोषणा कर दी थी.

हिज़बुल मुजाहिदीन भारत प्रशासित कश्मीर में सक्रिय प्रमुख चरमपंथी गुट हैं. ये पिछले दो दशकों से सक्रिय है.

इसके कमांडर सैयद सलाहुद्दीन पाकिस्तान प्रशासित मुज़फ़्फ़राबाद स्थित एक अन्य चरमपथी संगठन यूनाइटेड जेहाद काउंसिल के भी प्रमुख हैं.

हिज़बुल मुजाहिदीन को भारत प्रशासित कश्मीर में कार बम धमाकों के लिए ज़िम्मेदार माना जाता है.

इस चरमपंथी संगठन ने जुलाई, 2000 में संघर्ष विराम की घोषणा की थी लेकिन एक पखवाड़े में ही उसे वापस ले लिया.

लश्करे तैबा का नाम हाल के भारतीय सेना के चरमपंथियों के संघर्ष में सामने आया है.

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि पिछले महीने इस गुट ने श्रीनगर के काठीदरवाज़ा में एक पुलिस स्टेशन को बम धमाके से उड़ा दिया था.

वर्ष 1999 में करगिल संघर्ष के बाद इस गुट ने भारत प्रशासित कश्मीर में कई आत्मघाती हमले किए हैं.

हालांकि ये उसे फ़िदायीन हमले क़रार देता है और उसका कहना है कि ये आत्मघाती हमलों से अलग है क्योंकि इसमें चरमपंथी के जिंदा वापस आने की उम्मीद रहती है.

इस गुट ने कुछ समय पहले दिल्ली में लाल किले पर हमले की भी ज़िम्मेदारी ली थी.

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