भविष्य निधि घोटाले की जांच

भारतीय सर्वोच्च न्यायालय
Image caption भविष्य निधि घोटाले के मुख्य अभियुक्त की मौत की मैजिस्टीरियल जांच के आदेश.

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ग़ाज़ियाबाद के भविष्य निधि घोटाले के मुख्य अभियुक्त और अहम गवाह आशुतोष अस्थाना की शनिवार को डासना जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में मैजिस्टीरियल जांच के आदेश दिए हैं.

आशुतोष अस्थाना ने अपनी जान को ख़तरा बताते हुए कई बार सुरक्षा की मांग की थी. उसके परिवार का आरोप है कि आशुतोष अस्थाना की गहरी साज़िश करके ह्त्या की गई क्योंकि उसने बड़े बड़े जजों के भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ किया था.

ग़ाज़ियाबाद बार एसोशियेशन के वरिष्ठ वकील नाहर सिंह ने अपनी याचिका में मांग की थी कि अस्थाना की मौत की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच टीम बनाई जाए और मामले के अन्य गवाहों एवं अभियुक्तों की सुरक्षा की जाए.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अस्थाना की मौत की जांच गाजियाबाद के ज़िला जज द्वारा नामज़द एक न्यायिक मजिस्ट्रेट करेंगे.

न्यायिक मजिस्ट्रेट यह जांच दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 176 के तहत करेंगे, जिसमें हिरासत में हुई मौतों की अनिवार्य मजिस्टीरियल जांच का प्रावधान है.

अदालत ने आदेश दिया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस आशुतोष अस्थाना की आंत के नमूने सीबीआई को सौंपेगी और सीबीआई इसकी जांच अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली से कराएगी.

अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि मामले के अन्य गवाहों और अभियुक्तों को सुरक्षा प्रदान की जायेगी.

लेकिन याचिका कर्ता नाहर सिंह इस आदेश से संतुष्ट नही हैं. उनका कहना है कि इसकी स्वतंत्र आपराधिक जांच कराई जाए.

घोटाले की पृष्ठभूमि

इस घोटाले में कोर्ट के कर्मचारियों के भविष्य निधि खातों के नाम पर लगभग 23 करोड़ रुपये निकाल लिए गए थे. फरवरी 2008 में हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले में आशुतोष अस्थाना समेत कोर्ट के कई कर्मचारियों और दूकानदारों के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमा दायर किया गया.

बाद में अस्थाना ने मजिस्ट्रेट के सामने अपने इक़बालिया बयान में स्पष्ट किया कि यह रूपया उससे जजों ने अपने खर्चों और ऐशोआराम के लिए निकलवाया था. यह पैसा हाईकोर्ट के जजों पर भी खर्च हुआ, जिसमें से एक जज इस समय सुप्रीम कोर्ट में हैं.

कुल 36 जजों के नाम प्रकाश में आये. अस्थाना ने जजों को दिए गए धन, संसाधन और सामान का विस्तृत विवरण दिया. साथ में रसीदें एवं अन्य दस्तावेज भी दिए. शुरू में जजों ने इसकी जांच में कई अड़ंगे लगाए. लेकिन जनमत के दबाव में सुप्रीम कोर्ट ने मामला सीबीआई को जांच के लिए सौंप दिया.

गंभीर मामला

भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में यह एक अत्यंत गंभीर मामला है जिस पर सब की निगाहें है. न्यायिक सुधारों के लिए संघर्षरत सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण का कहना है, “जब बड़े बड़े जज इस घोटाले में अभियुक्त हों तो फिर ग़ाज़ियाबाद के एक न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच पर जनता को कैसे विश्वास होगा”.

श्री प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान मांग की थी कि अस्थाना कि मौत की जांच के लिए प्रकाश सिंह और किरण बेदी जैसे ईमानदार और निर्भीक अफ़सरों की टीम बनायी जाए. लेकिन कोर्ट ने इसे नामंज़ूर कर दिया.

उनका कहना है, ''ख़ानापूरी ही हो रही है, क्योंकि आज तक किसी जज को चार्ज शीट नही किया गया है. और अस्थाना की मौत भी मुझे तो सीधे सीधे एक हत्या की साज़िश लग रही है, जिसमें बड़े बड़े लोग शामिल होंगे.''

गाजियाबाद जजी घोटाला न्यायपालिका की आतंरिक व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है.

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