दूरसंचार विभाग में सीबीआई का छापा

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Image caption आरोप है कि वर्ष 2001 की क़ीमतों पर लाइसेंस जारी कर दिए गए

मोबाइल कंपनियों को टू-जी स्पैक्ट्रम लाइसेंस के आवंटन में कथित रुप से हुई अनियमितता की जाँच के लिए केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने दूरसंचार विभाग के मुख्यालय पर छापा मारा है.

भ्रष्टाचार निरोधक क़ानून के तहत दूरसंचार विभाग के अज्ञात अधिकारियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने के बाद सीबीआई ने गुरुवार को दिल्ली के दूरसंचार विभाग के मुख्यालय में छापा मारा है.

फ़रवरी, 2008 में कोई दो दर्जन नई कंपनियों को मोबाइल लाइसेंस दिए गए थे.

आरोप है कि बाज़ार दरों की तुलना में बहुत कम दरों पर ये लाइसेंस जारी कर दिए गए थे जिससे सरकार को हज़ारों करोड़ रुपयों की राजस्व की हानि हुई थी.

केंद्रीय सतर्कता आयोग ने इस आवंटन के लिए अपनाई गई प्रक्रिया की जाँच सीबीआई से करवाने के आदेश दिए थे.

इस प्रक्रिया को लेकर बड़े सवाल उस समय खड़े हुए जब दो कंपनियों, यूनिटेक वायरलेस सर्विसेस और स्वान टेलीकॉम ने लाइसेंस मिलने के कुछ ही दिनों बाद उसे बहुत ऊँची क़ीमतों पर बेच दिया था.

सीबीआई के अधिकारियों ने वायरलेस प्लानिंग सेल और एक्सेस सर्विसेस के उपमहानिदेशक के कार्यालय में दस्तावेज़ों की जाँच की है.

सीबीआई ने एक बयान में कहा है कि उनकी सूचना के अनुसार इन लाइसेंसों के आवंटन में दूरसंचार विभाग के अधिकारियों और लाइसेंस हासिल करने वाली कंपनियों के अधिकारियों के बीच साँठगाँठ थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार दूरसंचार विभाग का कोई अधिकारी इस सीबीआई छापे पर टिप्पणी करने के लिए उपलब्ध नहीं था.

कई विपक्षी दल गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए संचार मंत्री ए राजा को हटाने की मांग करते रहे हैं.

लेकिन दूरसंचार मंत्री ए राजा ने इस्तीफ़ा देने से इनकार करते हुए कहा, "मेरे इस्तीफ़े का सवाल ही नहीं उठता. स्पेक्ट्रम के लाइसेंस देने का फ़ैसला ट्राइ के नियमों के अनुसार हुआ है और इसके लिए प्रधानमंत्री से सलाह मशविरा भी किया गया था."

विपक्षी दलों का कहना है कि इससे सरकार को 60 हज़ार करोड़ रुपयों का नुक़सान हुआ है. हालांकि विशेषज्ञों ने 20 से 25 हज़ार करोड़ रुपयों के नुक़सान का अनुमान लगाया है.

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