पटना में छठ घाटों की बदहाली

गंगा घाट
Image caption बारिश और बाढ़ ने घाटों की हालत ख़राब कर दी है

देश के कई हिस्सों में शुक्रवार से तीन दिनों की छठ पूजा शुरू हो चुकी है. खासकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में ज़्यादा मशहूर इस पर्व को बहुत ही नियम- निष्ठा और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है.

नदियों और तालाबों के किनारे सजते हैं घाट. वहाँ सूप- डाला, यानी बांस के बर्तनों में रहता है तरह- तरह के कंद- मूल- फल और पकवानों का चढावा. तब होता है पहले डूबते सूरज को और अगली सुबह उगते सूरज को पवित्र दूध- जल से अर्घ्य- दान. यही खासियत है इस उपासना की.

हिन्दू समुदाय से जुड़ी तमाम जातियों के ग़रीब- अमीर लोगों का हुजूम बिना किसी भेदभाव के एक साथ इस मौके पर उमड़ आता है. इसलिए इसे लोक-आस्था का महापर्व कहा जाने लगा है.

बिहार के मगध क्षेत्र को, विशेष रूप से पटना को छठ-पर्व का केंद्र-स्थल माना जाता है. यहाँ हर साल गंगा नदी के किनारे लाखों-लाख की तादाद में छठ-व्रतियों और श्रद्धालुओं का जमावड़ा होता है. पूरे पटना शहर और उस से जुड़ी गंगा के सैकड़ों घाटों तक होती है मनमोहक सजावट और चकाचक रौशनी. साथ ही छठ-महिमा के पारंपरिक गीत-संगीत से तीन दिनों तक गुंजायमान रहता है यहाँ का वातावरण.

यह अकेला ऐसा त्यौहार है, जिस दौरान सब-के-सब इस पूजा में एक-दूसरे की मदद करने को तत्पर ही नहीं, लालायित रहते हैं.

यही कारण है कि देश में ही नहीं, विदेशों में भी पटना के छठ-पर्व की बड़ी ख्याति है. लोग इसे दूर-दूर से देखने आते हैं.

लेकिन इस बार यहाँ का ये महापर्व अचानक आन पड़ी एक मुश्किल से गुज़र रहा है. बरसात बीत जाने के बाद यहाँ गंगा नदी में बेमौसम उफान आ जाने से पटना के अधिकांश गंगा-घाटों पर ऊपर तक कीचड़-पानी चढ़ आया है.

राज्य सरकार ने अस्सी से भी ज्यादा प्रमुख घाटों को छठ-व्रत में उपयोग नहीं करने लायक बता कर वहाँ ख़तरे की चेतावनी दे दी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दानापुर से पटनासिटी तक गंगा-घाटों का दो-दो बार मुआयना किया.

असहाय प्रशासन

Image caption मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दो बार घाटों का मुआयना कर चुके हैं

घाटों की स्थिति बेहद ख़राब देख उन्होंने शहर के पार्कों और खाली स्थानों पर अस्थायी तालाब खोदने के निर्देश दिए. लगभग पचास ऐसे तालाबों का हड़बडी में जैसे-तैसे निर्माण हुआ भी. लेकिन ये तो ऊँट के मुंह में जीरे जैसी बात हुई.

पंद्रह-बीस किलोमीटर लम्बाई में फैले यहाँ के सैकड़ों गंगाघाट छठ के दिन जो लाखों लोगों की भीड़ सम्हालते रहे हैं, उन का विकल्प संभव है भी नहीं.

ज़ाहिर है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा ख़तरनाक घोषित किये गये घाटों पर भी छठ-व्रतियों की भीड़ जुटेगी ही. ऐसे में सुरक्षा के कारगर प्रबंध कर पाने की चिंता में प्रशासन के हाथ-पांव पहले से ही फूलने लगे है.

उधर पटना के अधिकांश गंगा-घाटों पर गन्दगी और चुभने वाले कचरों से भरी दलदली मिट्टी पर ठीक से खड़े रह पाना मुश्किल है. इस स्थिति से नाराज़ पटनावासियों का कहना है, "गंगा का पानी बढ़ने से कम लेकिन घाटों पर गन्दगी का अंबार लगे रहने से ये समस्या ज़्यादा विकट हुई है. राज्य सरकार और नगर निगम के अधिकारी कल तक सोये हुए थे और आज वो अचानक उठ कर हड़बड़ी में हाथ-पांव मार रहे हैं."

इन घाटों की समय पर सफाई नहीं करवा पाने के आरोपों से घिरी राज्य सरकार बचाव की मुद्रा में है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है " किसे पता था कि छठ के समय गंगा में अचानक इतना पानी बढ़ जायेगा ? ऐसे प्राकृतिक कारणों से पैदा हुई समस्याओं के लिए सरकार को दोष देना ठीक नहीं. फिर भी सुरक्षा और घाटों की वैकल्पिक व्यवस्था का पूरा प्रयत्न किया गया है."

दरअसल हुआ ये कि उत्तर प्रदेश की तरफ घाघरा नदी में आयी बाढ़ का पानी बिहार में सीवान-दरौली के रास्ते यहाँ गंगा नदी में गिरने लगा. इस कारण पटना के पास गंगा नदी उफन गयी. इसलिए यहाँ घाटों पर ऊपर चढ़े पानी के साथ-साथ कीचड़ भरी गन्दगी पसर गयी. अब हालांकि पानी तेजी से घट रहा है, फिर भी घाटों की हालत बहुत ख़राब है.

बावजूद इस मुसीबत के, यहाँ लोगों में छठ को लेकर व्याप्त धार्मिक उमंग-उत्साह में कोई खास कमी नहीं आई है. लेकिन हाँ, गंगा तट पर इस महापर्व की पहले जैसी रौनक नहीं है.

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