ताली दोनों हाथों से बजती है: पाकिस्तान

शाहिद मलिक
Image caption पाकिस्तानी उच्चायुक्त के अनुसार तालेबान के ख़िलाफ़ कार्रवाई जड़ से उखाड़ने के लिए है

भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त शाहिद मलिक ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि 'पाकिस्तान ने भारत-पाक समग्र वार्ता शुरु करने की हर मुमकिन कोशिश की है और वह चाहता है कि भारत भी ऐसा कोई क़दम उठाए जिससे ज़ाहिर हो कि व्यवहारिक रुप से भारत भी संबंधों को आगे बढ़ाना चाहता है.'

बीबीसी के साथ एक विशेष बातचीत में पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने कहा कि ताली दोनों हाथों से बजती है. मुंबई बम धमाकों के बाद समग्र वार्ता के रुकने और दबाव की रणनीति पर उनका कहना था कि पाकिस्तान किसी भी तरह के दबाव में आने वाला नहीं है.

उन्होंने कहा कि तालेबान को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए दक्षिणी वज़ीरिस्तान में कार्रवाई हो रही है जो चार से आठ हफ़्ते तक चल सकती है. उन्होंने माना कि इसकी प्रतिक्रिया शहरों में हो सकती है लेकिन ज़ोर देकर कहा कि इस बार कार्रवाई ऐसी होगी कि तालेबान वापस न लौट सकें.

'भारत कोई क़दम उठाए'

बीबीसी ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त शाहिद मलिक से पूछा कि बीच-बीच में विभिन्न स्तर पर भारत-पाकिस्तान बातचीत के बावूजद समग्र भारत-पाक वार्ता को आगे बढ़ाने में क्या अड़चन है?

उनका कहना था, "पाकिस्तान की कोशिश है और वह चाहता है कि भारत से पाकिस्तान के दोस्ताना संबंध हों..जो एक पड़ोसी देश के संबंध होने चाहिए...वे हों. मुझे ख़ुशी है कि भारत के नेताओं की ओर से भी यही ख़्वाहिश रही है...लेकिन ये सवाल आप अपने देश के नेताओं से पूछें. हमने हर मुमकिन कोशिश की है कि बातचीत का सिलसिला शुरू हो."

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "ताली दोनों हाथों से बजती है. हमें जो करना था वो कर दिया और हम चाहते हैं कि भारत की ओर से भी ऐसा कोई क़दम उठाया जाए जिससे यह ज़ाहिर हो कि व्यवहारिक रुप से भारत भी संबंधों को आगे बढ़ाने का ख़्वाहिशमंद है...मिस्र के शर्म-अल-शेख़ के साझा बयान में दोनों देशों ने ये फ़ैसला किया कि संबंध बेहतर करने के लिए बातचीत ही एक रास्ता है."

बीबीसी ने उनसे पूछा कि उनके नज़रिए में मुंबई धमाकों के बाद भारत-पाक समग्र वार्ता का रुकना क्या दबाव की रणनीति है या कोई और बात है.

उनका कहना था, "पाकिस्तान किसी दबाव में आने वाला नहीं है, जहाँ तक मुंबई की बात है तो जब हमला हुआ उसके बाद से द्विपक्षीय बातचीत का सिलसिला रुका हुआ है. मिस्र का साझा बयान पढ़ें, जिसमें साफ़-साफ़ दोनों चीज़ों को अलग किया गया था. अर्थात, मुंबई के हमलावरों पर कार्रवाई और बातचीत को अलग रखा गया. जब तक दोनों देश आपस में बैठकर बात नहीं करेंगे, मुद्दों के बारे में पता नहीं चलेगा....मैं आपको बताता चलूं कि पाकिस्तान में तफ़्तीश हो रही है और इसमें कोई रुकावट नहीं है...हमने भारत से जानकारी माँगी हैं, जिससे पाकिस्तान सरकार के हाथ मज़बूत होंगे और अगर हमें वो जानकारी मिलेंगी तो हम और प्रभावी ढ़ंग से कार्रवाई करेंगे."

'जड़ से उख़ाड़ फेंकने की कार्रवाई'

पाकिस्तान में तालेबान के ख़िलाफ़ कार्रवाई कितनी लंबी चल सकती है, इस पर शाहिद मलिक का कहना था, "न साल लगेंगे और न ही कई महीने. लेकिन चंद हफ़्ते ज़रूर लगेंगे. अभी तक ये अंदाज़ा है कि चार से आठ हफ़्ते लग सकते हैं. इस कार्रवाई में सेना और जो लोग शामिल हैं उनकी ख़्वाहिश है कि जल्द से जल्द ये पूरी हो. कुछ ज़्यादा समय की बात मैंने इसलिए कही है ताकि चरमपंथियों को जड़ से उखाड़ फेंका जाए, नहीं तो सीधी कार्रवाई बहुत ही आसान है."

उनसे पूछा गया कि क्या दक्षिणी वज़ीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई की प्रतिक्रिया में तालेबान शहरों को निशाना बना रहे हैं? इस पर शाहिद मलिक बोले, "हमें कहने में कोई झिझक नहीं है कि जो कार्रवाई हो रही है, उसकी प्रतिक्रिया ज़रूर होगी. ज़ाहिर है ये हताश क़िस्म का दुश्मन है जिसे जब कोई रास्ता नहीं दिखता तो जहाँ कुछ भी दिखे उसे निशाना बनाता है."

आईएसआई और अफ़-पाक

उनसे जब तालेबान के लड़ाकों या अन्य चरमपंथी गुटों के साथ ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के निचले स्तर पर कोई संबंध होने के आरोपों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इन आरोपों को ख़ारिज किया. उनका कहना था, “मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि हमारी एजेंसी में ऐसा कोई भी तत्व नहीं जिसकी ओर ऐसा इशारा किया जाए.

उन्होंने इस बात से इनकार किया कि अफ़-पाक यानी अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान क्षेत्र को चरमपंथ की समस्याओं के संदर्भ में एक अंतरराष्ट्रीय नज़रों में तरह देखा जा रहा है.

उनका कहना था, "दोनों देशों को एक तरह से नहीं देखा जा रहा है और ना ही हम उन्हें पंसद करते हैं जो दोनों दोशों को एक ही तरह देखने की कोशिश करते हैं. अफ़ग़ानिस्तान की जो समस्याएं हैं उनसे पाकिस्तान की कोई समानता नहीं है. मैं इस बात को ख़ारिज करता हूँ. जो अफ़ग़ानिस्तान की समस्याएं हैं...उनका असर पाकिस्तान पर ज़रूर पड़ता है, क्योंकि तहरीक़-ए-तालेबान के तार अफ़ग़ानिस्तान से मिलते हैं, जिसको लेकर हमारी चिंता है."